प्लांट का प्लान नहीं उतरा जमीन पर

Uttar Kashi Updated Mon, 20 Jan 2014 05:47 AM IST
उत्तरकाशी। सरकारी उपेक्षा के चलते मोरी प्रखंड के ग्रामीणों का पारंपरिक भेड़पालन और ऊन व्यवसाय से मोह भंग होता जा रहा है। पांच साल पहले स्वीकृति के बावजूद अभी तक न तो यहां कार्डिंग प्लांट लग पाया है और न ही अभी तक खादी ग्रामोद्योग विभाग की ओर से भेड़पालकों से ऊन खरीद शुरू की गई है। ऐसे में ग्रामीणों की ऊन पर टिकी आजीविका चौपट हो गई है।
भेड़-बकरी पालन के पारंपरिक व्यवसाय वाले सीमांत जनपद उत्तरकाशी में पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक करीब एक लाख बकरी और 90 हजार भेड़ें हैं, जिनसे ग्रामीण सालाना एक हजार क्विंटल से ज्यादा ऊन का उत्पादन करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा भागीदारी अकेले मोरी प्रखंड के 39 गांवों की है। इस ऊन से ग्रामीण अपनी जरूरत के ऊनी वस्त्र तैयार करने के साथ ही बड़ा हिस्सा खादी ग्रामोद्योग बोर्ड को बेच देते हैं, जिससे ग्रामीणों की आजीविका चलती है। स्वयं कपड़े बनाने के लिए कच्ची ऊन को कार्डिंग कराकर टॉप्स बनवाने पड़ते हैं। ग्रामीणों की आजीविका से जुड़े ऊनी वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खादी बोर्ड की ओर से वर्ष 2008 में गैच्वांणगांव मोरी में 3.39 करोड़ लागत से कार्डिंग प्लांट स्वीकृत किया गया था। लेकिन यह अभी तक नहीं लग पाया। ऐसे में भेड़पालक पुरोला तथा जिला मुख्यालय के कार्डिंग प्लांट तक दौड़ लगाने को मजबूर हैं। अभी तक खादी बोर्ड ने ऊन की खरीद भी शुरू नहीं की है। जिससे ग्रामीणों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

कार्डिंग प्लांट लगे तो बात बने
मोरी प्रखंड के अंतर्गत रेक्चा गांव के रमेश, पवाणी के राय सिंह, कासला के सैदर सिंह, जखोल के जयवीर सिंह आदि का कहना है कि यदि मोरी में कार्डिंग प्लांट स्थापित हो जाए तो न सिर्फ भेड़पालकों को सहूलियत होगी, बल्कि खादी बोर्ड भी यहीं ऊनी वस्त्र उद्योग पनपा कर स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया करा सकता है। खादी बोर्ड की ओर से खरीद न किए जाने से अब हम घरों में जमा क्विंटलों ऊन कहां ले जाएं?
वर्ष 2008 में स्वीकृत कार्डिंग प्लांट के लिए गैच्वांणगांव में चयनित जमीन उपयुक्त नहीं पाई गई। इसे निरस्त कर अब कोट गांव में भूमि का चयन किया गया है। भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव प्रशासन को दे दिया गया है। स्वीकृति के साथ इस पर कार्य कराया जाएगा।
- बीसी गुरुरानी, खादी ग्रामोद्योग अधिकारी उत्तरकाशी।
ऊन खरीद के लिए जिला योजना में 12.48 लाख का बजट मिला है। इससे भेड़पालकों से पूरी ऊन खरीद संभव नहीं है। शासन को 42 लाख का प्रस्ताव दिया गया है। पिछले साल ही 37 लाख की ऊन खरीदी गई थी। स्वीकृति मिलने पर ही डुंडा तथा मोरी में शिविर लगाकर ऊन की खरीद की जाएगी। - सुरेंद्र सिंह बौनाल, क्षेत्रीय अधीक्षक ऊन।

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