पानी की कमी से थमी टरबाइनों की रफ्तार

Uttar Kashi Updated Mon, 20 Jan 2014 05:48 AM IST
उत्तरकाशी। जलागम क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण भागीरथी के वाटर डिस्चार्ज में आई कमी बिजली परियोजनाओं पर भारी पड़ने लगी है। 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण और 304 मेगावाट की स्टेज टू से रोजाना महज दो मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन हो पा रहा है। पहले आपदा की मार और अब पानी की कमी के चलते इस बार इन दोनों परियोजनाओं से बिजली उत्पादन का वार्षिक लक्ष्य हासिल हो पाना असंभव है।
मनेरी बैराज पर भागीरथी में आजकल महज 25 क्यूमेक्स पानी उपलब्ध है। 30-30 मेगावाट की तीन टरबाइनों वाली मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना में एक मशीन के लिए 23 क्यूमेक्स पानी की जरूरत होती है। ऐसे में सुबह और शाम को कुल सात घंटे दो टरबाइनों से 60 मेगावाट , शेष समय से एक टरबाइन से 30 मेगावाट उत्पादन ही हो पा रहा है। जून 2013 की आपदा में तिलोथ विद्युतगृह में टेल रेस चैनल के गेट जाम होने के कारण करीब दो माह तक विद्युत उत्पादन ठप रहा था। ऐसे में इस बार परियोजना से 457 मियू वार्षिक उत्पादन लक्ष्य हासिल होना नामुमकिन है। इधर जोशियाड़ा बैराज पर भागीरथी में 30 क्यूमेक्स वाटर डिस्चार्ज मिल रहा है। 76-76 मेगावाट की चार टरबाइनों वाली इस परियोजना में एक टरबाइन की जरूरत 35 क्यूमेक्स है। ऐसे में बड़ी मुश्किल से पीक आवर में दो टरबाइनें चलाकर 1.2 मियू उत्पादन हो पा रहा है। यह परियोजना तो 1200 मियू वार्षिक उत्पादन लक्ष्य के आसपास पहुंचती भी नहीं दिख रही।
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एक माह में ही 10 लाख यूनिट घटा उत्पादन
उत्तरकाशी। दिसंबर माह में भागीरथी में मनेरी बैराज पर वाटर डिस्चार्ज 37 क्यूमेक्स और जोशियाड़ा बैराज पर 45 क्यूमेक्स था। जिससे ये दोनों परियोजनाएं तीन मिलियन यूनिट बिजली पैदा कर रही थीं। तापमान में गिरावट से भागीरथी के पानी में 12 क्यूमेक्स की कमी आई और दोनों परियोजनाओं का विद्युत उत्पादन तीन से घट कर महज दो मियू रह गया।
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पानी की कमी के कारण धरासू विद्युतगृह से 1.2 मियू उत्पादन हो रहा है। इस बार परियोजना का वार्षिक लक्ष्य 1200 मियू है, जिसके सापेक्ष अभी तक 770 मियू उत्पादन हो पाया है। बरसात के दौरान परियोजना बंद न करनी पड़े, इस इंतजाम से ही विद्युत उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
---विपिन बिहारी सिंघल, डीजीएम धरासू विद्युतगृह।
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तिलोथ विद्युतगृह में आजकल 0.82 मियू विद्युत उत्पादन हो रहा है। इस बार वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 457 मियू के सापेक्ष अभी तक 335 मियू बिजली पैदा हो पाई है। आपदा के दौरान दो माह परियोजना बंद न रहती तो लक्ष्य से ज्यादा बिजली पैदा होती।
----अंबरीश यादव, ईई तिलोथ विद्युतगृह।

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