बदरंग हुए पहाड़, नदियां अशांत

Uttar Kashi Published by: Updated Wed, 10 Jul 2013 05:31 AM IST
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उत्तरकाशी। हरे-भरे दिखने वाले पहाड़ अब लाल दिखाई दे रहे हैं और अपने शांत प्रवाह में बहने वाली नदियां एवं गाड़-गदेरे रौद्र रूप के साथ मटमैले रंग में बह रहे हैं। यह हाल है आपदा प्रभावित सीमांत जनपद उत्तरकाशी का। यहां आपदा से कई गांव आधे से अधिक तबाह हो रखे हैं तो कई गांव तबाही की कगार पर हैं। हजारों परिवारों के पास अब सिर ढकने के लिए छत तक नहीं है। ऐसे में ग्रामीण अपने गांव छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
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प्रशासन भले ही अभी तक पूरे जिले में हुई तबाही के आंकड़े नहीं जुटा पाया, लेकिन अमर उजाला की टीम की ओर से अब तक किए गए भ्रमण के अनुसार जिले में आपदा से भारी नुकसान हुआ है। इसमें सबसे अधिक नुकसान गंगा घाटी के विकासखंड भटवाड़ी में हुआ है। न्यू डिडसारी गांव के 20 भवन गंगा की जलधारा में बह गए हैं। 50 परिवारों वाला यह गांव वीरान हो रखा है। सिरोर गांव के 13 भवन खतरे की जद में हैं। ढासड़ा, सेकू गांव पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। यहां लगातार दरकती पहाड़ी के भय से लोग छानियों में शरण लिए हैं। दूरस्थ गांव पिलंग और जौंडाव में भी कई भवन बाढ़ में बह गए। स्याबा, औंगी, मनेरी, तिलोथ, मांडों तथा डुंडा प्रखंड के उडरी, सौड, मातली गांव में कई भवनाें को खतरा बना है। यही हाल यमुनाघाटी का भी है। खरादी कस्बे के साथ ही यहां कई गांवों पर तबाही का खतरा मंडरा है।

आपदा में अपने घर, खेत-खलियान, कृषि भूमि गंवा चुके हजारों परिवाराें के पास अब सिर ढकने के लिए छत तक नहीं है। प्रभावित परिवार सरकारी स्कूल, टेंट व अपने नाते-रिश्तेदारों के यहां रह रहे हैं। उन्हें अब भविष्य की चिंता सता रही है कि वह क्या खायेंगे और कहां रहेंगे। ऐसे में ग्रामीण अब गांव छोड़ने के लिए मजबूर हैं।

24 दिन में नहीं जुट पाए पूरे आंकड़े
उत्तरकाशी। जिले की सरकारी मशीनरी की चाल एकदम सुस्त है। आपदा को 24 दिन बीत गए हैं, लेकिन अब तक प्रशासन जिले में हुई तबाही के पूरे आंकड़े नहीं जुटा पाया। प्रशासन के मुताबिक अब तक पूरे जिले में 149 भवन पूर्ण ध्वस्त, 84 तीक्ष्ण तथा 319 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसमें 439 परिवारों को 3 करोड़ 5 लाख की अहेतुक राशि दे दी गई है। 164.177 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ में बही। आपदा से 2991 लोग प्रभावित हुए हैं।

और बढ़ेगी संवेदनशील गांव की संख्या
उत्तरकाशी। जिले में अभी तक 103 गांव विस्थापन की सूची में थे, लेकिन अब इन गांवों की संख्या में और बढ़ोत्तरी होनी की संभावना हैं। इस बार कई गांव हैं भूस्खलन और भू-धंसाव की चपेट आ गए है, लेकिन यह गांव अभी तक प्रशासन की विस्थापन की सूची में नहीं थे।

क्या कहते हैं प्रभावित
हमारा गांव पूरी तरह से खतरे की जद में है। ऊपर से पहाड़ दरक रहा है। गांव वालों ने छानियों में शरण ले रखी है। प्रशासन की ओर से अभी तक अधिकारी तो दूर पटवारी तक भी गांव में नहीं पहुंचा। गांव का विस्थापन होना चाहिए। -राजबाला, सेकू गांव

बरसों से आपदा का कहर झेल रहे हैं। कभी भूकंप तो कभी बाढ़ से गांव में तबाही मची। इस बार तो पूरा गांव बह गया है। गांव वालों ने सरकारी स्कूल में शरण ले रखी है। वहां भी कब रहेंगे। गांव का जल्द से जल्द विस्थापन होना चाहिए। - गुलाबी देवी, न्यू डिडसारी

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