बाल विज्ञान कांग्रेस से आगे आ रहे हैं बच्चे

Uttar Kashi Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस बाल वैज्ञानिकों की शोध प्रवृत्ति को सामने लाने का अच्छा मंच साबित हो रहा है। दो दशक में लगातार 18 बार जिले के बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके हैं।
बच्चों की शोध प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्ष 1993 में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस शुरू की। इसमें 18 वर्षों से लगातार जिले के बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। इस बार भी जिले के तीन बाल वैज्ञानिकों की परियोजनाएं राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित हुई हैं। इन समेत अब तक जिले के 38 बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर चुके हैं। जिनमें से वर्ष 1998 में जड़ी-बूटी पर मनीष गुसाईं तथा 2004 में घराट पर रवींद्र राणा के शोध राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ आंके गए। इनके शोध पर डीएसटी द्वारा फिल्मांकन भी कराया गया था। इस बार सीनियर वर्ग में राष्ट्रीय स्तर के लिए चयनित हुई सरस्वती विद्या मंदिर चिन्यालीसौड़ की 11वीं की छात्रा प्रियंका तिवाड़ी ने ऊर्जा की बचत पर शोध तैयार किया है। इस कार्य में शिक्षक मनीष जगूड़ी ने उनका मार्गदर्शन किया। जूनियर वर्ग में चयनित सरस्वती विद्या मंदिर चिन्यालीसौड़ में 9वीं के छात्र शुभम पंवार ने ऊर्जा के विकल्प पर शोध कर चीड़ की पत्तियों, गाजर घास आदि खरपतवार को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने पर शोध किया। शिक्षक पदमेंद्र रौथाण ने उनका मार्गदर्शन किया। जूनियर वर्ग में ही चयनित जीआईसी कोटधार गमरी में 9वीं के छात्र संदीप नौटियाल ने जैविक ईंधन के धूम्र रहित ऊपयोग पर शोध किया। इसमें शिक्षक अनिल रावत ने उनका मार्गदर्शन किया।

सर्वश्रेष्ठ शोध होगा पेटेंट
इस बार डीएसटी ने राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ पाए जाने वाले बाल शोध को पेटेंट कराकर इन्हें परिष्कृत कर अमली जामा पहनाने की तैयारी में है।- डा.एसएस मेहरा मंडल समन्वयक, राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस

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