.. फिर भी नहीं ले रहे सबक

Uttar Kashi Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। माना भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती, लेकिन मानकों के तहत भवन निर्माण से नुकसान को कम तो किया ही जा सकता है। इस बात को जानते समझते हुए भी आम जनमानस तो दूर सरकारी मशीनरी भी सीख लेने को तैयार नहीं है। यही कारण है कि भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील जोन-4 व 5 में होने के बावजूद इस जनपद के नगर कस्बे बेतरतीब निर्माण से मानव जनित आपदा को न्योता दे रहे हैं।
विनियमित क्षेत्र में नक्शा पास कराने की अनिवार्यता है। इस आधार पर प्रशासन नगर में मानकों के अनुरूप भवन निर्माण के दावे करता है। जबकि धरातल पर नजर दौड़ाएं तो उत्तरकाशी नगर कंक्रीट के ऐसे जंगल में तब्दील होकर रह गया है, जिसमें आने-जाने के लिए पर्याप्त चौड़ाई में रास्ते तक नहीं हैं। अग्निकांड की स्थिति में दमकल वाहन नगर के भीतर तक नहीं पहुंच पाता।
बढ़ती आबादी के दबाव में घनी बस्ती में तब्दील हो रहे ग्रामीण इलाकों में तो स्थिति और भी विकट है। यहां भवन निर्माण पर किसी तरह का सरकारी नियंत्रण ही नहीं है। ऐसे में खेतों के आकार में ही लोग बेतरतीब ढंग से भवनों का निर्माण कर रहे हैं। इसमें पुरानी गूलों को ही पानी की निकासी और आवाजाही के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जिला मुख्यालय की निकटवर्ती जोशियाड़ा बस्ती इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जानकारों का मानना है कि यदि कभी बड़ी तीव्रता का भूकंप आया तो इन बस्तियों में आपदा से कम भगदड़ में ज्यादा नुकसान तय है।


अधिकारियों का कहना है--

12 मीटर ऊंचे भवनों का प्राविधान
पर्वतीय जनपदों में भवन की ऊंचाई 12 मीटर तथा तीन मंजिल तक निर्माण का प्राविधान था। पिछली सरकार ने इसी ऊंचाई में चार मंजिल तक निर्माण का शासनादेश जारी किया है। इसके साथ ही भूमि की नाप के अनुसार भवन के चारों ओर खाली जगह छोड़ने का भी नियम है। नगर क्षेत्र में पुराने निर्माणों से रास्ते संकरे हो चुके हैं।- जितेंद्र कुड़ियाल, अवर अभियंता नगर पालिका, उत्तरकाशी

खतरे का संकेत हैं बेतरतीब निर्माण
नए बस रहे कस्बों में बेतरतीब निर्माण आपदा के लिहाज से खतरे का संकेत है। अग्निकांड, भूकंप आदि आपदा के दौरान खोज एवं बचाव के लिए मौके तक पहुंचने के लिए पर्याप्त रास्ते जरूरी हैं। - देवेंद्र पटवाल, आपदा प्रबंधन अधिकारी उत्तरकाशी

आम जनता को जागरूक होना पड़ेगा
निरंतर आपदाओं को देखते हुए आम जनता को जागरूक होना चाहिए। नई बस्तियों के लिए ठोस मानक तैयार करने और इनका अनुपालन सुनिश्चित कराने की जरूरत है।, पीयूष रौतेला, अधिशासी निदेशक आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र देहरादून

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