भूकंप से नुकसान कम, दहशत फिर भी ज्यादा

Uttar Kashi Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। मंगलवार की शाम आए भूकंप के तेज झटके से भले ही जनपद में किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन वर्ष 1991 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी झेल चुके भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तरकाशी जनपद के लोग समय-समय पर आने वाले भूकंप के झटकों से दहशत में हैं।
मंगलवार को आए भूकंप का केंद्र असी गंगा घाटी के नौगांव में रहा। बाड़ाहाट के जिला पंचायत सदस्य कमल सिंह रावत ने बताया कि भूकंप से अगोड़ा गांव में पूर्व प्रधान शरद सिंह रावत व शिवराम पंवार आदि के मकानों की छत से पटालें नीचे जा गिरी। भूकंप के तेज झटके से दहशत में आए वासुदेव सिंह रावत तो अपने दुमंजिले मकान से छलांग लगाकर चोटिल हो गए। उधर गाजणा क्षेत्र के ल्वारखा गांव निवासी शावल चंद शाह ने बताया कि गांव में मदन सिंह राणा के कच्चे मकान की एक दीवार ढह गई तथा गोविंद सिंह व सुभद्रा देवी के मकानों में दरारें आईं। हालांकि मंगलवार को आए भूकंप से जनपद में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन बार बार आपदाओं से दो चार हो रहे जनपदवासी दहशत में हैं।

प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है
उत्तरकाशी। जिलाधिकारी डा.आर.राजेश कुमार ने कहा कि फिलहाल भूकंप से जिले में कहीं नुकसान की सूचना नहीं है। जोन-4 व 5 में होने से यहां भूकंप का खतरा तो हमेशा बना रहता है। ऐसे में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। आम जनता को भी जागरूक रहने के साथ ही भूकंपरोधी मानकों के अनुसार भवन निर्माण करने चाहिए।

आपदा पीड़ितों ने की समुचित मुआवजे की मांग
उत्तरकाशी। गंगोरी बाजार क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर व्यापारिक प्रतिष्ठानों की क्षति का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने आवासीय भवनों के बजाय परिवार को मानक मानने कर राहत राशि देने की मांग की है।
गंगोत्री के विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में बाढ़ पीड़ित संघर्ष समिति के अध्यक्ष केशर सिंह पंवार और नगर पालिका सभासद ने अवगत कराया कि गंगोरी में दर्जनों आवासीय एवं व्यवसायिक भवन अगस्त माह की बाढ़ की भेंट चढ़े। इसमें आवासीय भवनों को एक छत को आधार बनाकर राहत राशि वितरित की गई। इन भवनों में कई परिवार निवास करते थे। उन्होंने कहा कि पूर्व में आपदा के दौरान एक छत के नीचे रहने वाले परिवारों को मानक मानकर राहत राशि दी गई थी। लेकिन इस बार ऐसा न होने से प्रभावित दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
उन्होंने बताया कि बाढ़ में आशमा पंवार, भगवान सिंह चौहान, जसपाल चौहान, मनवीर मखलोगा, सतवीर सिंह, अंजली, राजू, प्रमोद, सज्जन सिंह, मुकेश आदि कई लोगों के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी नुकसान पहुंचा। लेकिन उन्हें मुआवजा तो दूर क्षति का आकलन तक नहीं कराया गया। आपदा पीड़ितों ने मुख्यमंत्री से समुचित मुआवजे की मांग की है।

असी गंगा घाटी के गांवों के विस्थापन की मांग
उत्तरकाशी। अगस्त माह में असी गंगा में आई भीषण बाढ़ की तबाही से घाटी के ग्रामीण उभर भी नहीं पाए थे कि इसी घाटी के नौगांव में केंद्र वाले भूकंप के झटके ने उन्हें फिर हिला डाला। वर्ष 1991 के विनाशकारी भूकंप में इस क्षेत्र में भले ही मौतों का आंकड़ा दो अंकों तक न पहुंचा हो, लेकिन मकान इस कदर क्षतिग्रस्त हुए थे कि बाद में करीब सभी लोगों को नए मकान बनाने पड़े। ऐसे में बार-बार आपदाओं से जूझ रहे इस क्षेत्र के गांवों को विस्थापित करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
वर्ष 1991 के भूकंप में असी गंगा घाटी के सेकू, ढासड़ा, भंकोली आदि गांवों में करीब एक दर्जन लोग मरे थे। अधिकांश मकान क्षतिग्रस्त होने पर ग्रामीणों को नए मकानों का निर्माण करना पड़ा। बीते अगस्त में आई बाढ़ में इसी घाटी में परियोजना निर्माण में लगे 19 नेपाली मजदूरों समेत 28 लोगों की मौत हुई। दर्जनों मकान, सड़क, पुल व रास्तों के साथ ही नदी किनारे सैकड़ों नाली जमीन बाढ़ की भेंट चढ़ गई। क्षेत्र के सबल सिंह रावत, सीमा शाह, जसमिला पंवार, संजय खंडूड़ी, बलवीर सिंह रावत, अतर सिंह पंवार, दयाल सिंह चौहान आदि पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि भूकंप और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। पहले से विकास की दौड़ में पिछडे़ इस क्षेत्र में लोगों का जीवन और कष्टमय हो गया है। ऐसे में ग्रामीण कहीं सुरक्षित स्थान पर विस्थापन की मांग करने लगे हैं।


बजट निर्गत न करने पर नाराजगी
लंबगांव (टिहरी)। चार माह पहले दैवीय आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुए मोटर मार्गों तथा रास्तों का मरम्मत कार्य करने वाले ठेकेदारों का भुगतान न होने पर ब्लॉक प्रमुख पूरण चंद्र रमोला ने नाराजगी जताई है। डीएम को भेजे पत्र में ब्लॉक प्रमुख रमोला ने कहा है कि अगस्त-सितंबर माह में लंबगांव-प्रतापनगर, लंबगांव-कोटालगांव, चमियाला-सेरा कंडियालगांव, कौडार, स्यांसू-भौंगा मोटर मार्गों पर आए मलबे को ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर स्वयं के खर्चों से साफ कराया। भुगतान न होने से ठेकेदार अब मजदूरों का भी भुगतान नहीं कर पा रहे है। विभागीय अधिकारी बजट न होने का हवाला देकर भुगतान करने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं।

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