कन्या भ्रूण हत्या रोकने को प्रयास की जरूरत

Uttar Kashi Updated Sun, 11 Nov 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की घटती संख्या के पीछे कन्या भ्रूण हत्या प्रमुख कारण है। इसकी रोकथाम के लिए प्रभावी प्रयास की जरूरत है। प्रसव पूर्व अल्ट्रासाउंड द्वारा लिंग जांच को लेकर मामले तो कई दर्ज होते हैं, लेकिन अपराधियों को सजा नहीं मिल पाती।
हिमालय पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान की ओर से एक्शन एड लखनऊ के सहयोग से आयोजित संवेदीकरण कार्यशाला में यह विचार सामने आए। संस्था के सचिव द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि बिगड़ता लिंगानुपात भविष्य के लिए खतरे का संकेत है। प्रसव पूर्व लिंग जांच को लेकर कई मामले दर्ज होते हैं, लेकिन सबूतों के अभाव में अपराधियों को सजा नहीं मिल पाती। इसके लिए न्यायालय में जाने से पूर्व पूरी तैयारी जरूरी है।
विषय विशेषज्ञ डा.एमके राव ने सलाहकार समिति, मॉनिटरिंग कमेटी के कार्य दायित्व, अल्ट्रासाउंड केंद्रों की अर्हताएं और मूल दस्तावेज के बारे में विस्तृत जानकारी दी। एसबीएमए के गोपाल थपलियाल ने कहा कि जहां शिक्षा बढ़ी है वहां लिंगानुपात गिरा है। इस मौके पर एनआरएचएम की विमला मखलोगा, संदीप उनियाल, राजू राजपूत, रमेश चमोली, राखी पंवार, मीनाक्षी आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

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