‘पारंपरिक फसलों को बनाएं आय का जरिया’

Uttar Kashi Updated Sat, 27 Oct 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। काश्तकारों के पारंपरिक कृषि से विमुख होने से मंडुआ, झंगोरा, रामदाना आदि फसलाें के उत्पादन में गिरावट आ रही है। रेणुका समिति ने नाबार्ड के सहयोग से मातली में क्रय-विक्रय केंद्र खोलकर किसानों को पारंपरिक फसल उत्पादन के लिए प्रेरित करने के लिए कदम आगे बढ़ाया है।
खेतीबाड़ी के बदलते ट्रेंड के चलते किसान खेतों में पारंपरिक फसलें उगाने से परहेज कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आयी है, जबकि जिले के कई इलाकों में इन फसलों के उत्पादन के लिए अनुकूल स्थितियां मौजूद हैं। बाजार में इनके अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। इस संबंध में रेणुका समिति ने रेणुका बकरवाल उत्थान स्वायत्त सहकारिता गठित की है। मातली में क्रय-विक्रय केंद्र का उद्घाटन करते हुए नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एस.सेलवेराज ने कहा कि ये पारंपरिक फसलें सिर्फ खाद्यान्न ही नहीं, बल्कि अपने गुणों के कारण औषधि का काम करती हैं। समिति के प्रमुख संदीप उनियाल ने बताया कि समिति पारंपरिक फसलों के विपणन की व्यवस्था कर रही है। ताकि किसानों को प्रेरित कर इनका उत्पादन बढ़ाया जा सके। इस मौके पर नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक एससी.गर्ग, उत्तरांचल ग्रामीण बैंक के कुलभूषण नौटियाल, हर्षमणी बिजल्वाण, धनमोहन बिष्ट, भगतराम जोशी आदि अनेक लोग मौजूद थे।

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