उफ! संवेदनशील इलाके में इतनी संवेदनहीनता

Uttar Kashi Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
सूरत सिंह रावत
उत्तरकाशी। बेशक दूरदराज के पहाड़ी इलाके में सड़क निर्माण जरूरी है, लेकिन जो इलाका इतना संवेदनशील हो कि सीटी की आवाज से कांप उठता हो। जहां पांवों की धमक से जलस्रोतों में बुलबुले उठने लगते हों, वहां विस्फोटकों से पहाड़ों का सीना छलनी करने के औचित्य पर सवाल तो उठेंगे ही। भैरोघाटी से नागा तक 32 किमी चीन की सीमा तक डबल लेन सड़क बनाने वाली एजेंसी बीआरओ ने इस कदर बेतरतीब भारी विस्फोटकों (डायनामाइट) का इस्तेमाल किया कि आसपास की चट्टानें अस्थिर हो गईं। सड़क निर्माण से निकलने वाला हजारों टन मलबा संकरी घाटी से बहने वाली जाड गंगा में उडे़ल कर उसे और संकरा कर दिया। गंगोत्री नेशनल पार्क के दुर्लभ जीवजंतुओं की शांति में भी खलल पड़ा है। पार्क प्रबंधन ने निर्माण एजेंसी पर चार लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। पूरी कवायद को तकनीकी और पर्यावरणविद खतरनाक बता रहे हैं। अगस्त में बादल फटने के बाद यहां हुई व्यापक तबाही के लिए विस्फोटकों से अस्थिर पहाड़ियां भी एक वजह रहीं। निर्माण एजेंसी ने गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में स्टोन क्रशर तक लगा रखा था। इसके लिए धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा था, जिसे बंद करवाने का दावा किया गया है।

एक साथ विस्फोटकों का प्रयोग गलत
सीपीडब्लूडी के पूर्व मुख्य अभियंता ए.एस.कनेरी स्वीकार करते हैं कि संवेदनशील उच्च हिमालयी क्षेत्र की चट्टानों को तोड़ने के लिए एक साथ बड़ी मात्रा में विस्फोटकों का प्रयोग गलत है। इसके लिए एक-एक करके विस्फोट करना सुरक्षित तरीका है। विस्फोटकाें से निकलने वाली ध्वनि तरंग के कंपन से आसपास के पहाड़ों के ज्वाइंट खुल जाते हैं। इसमें पानी घुसने के बाद भूस्खलन होने लगता है। चट्टानें दरकने लगती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ब्लास्टिंग कहां करना है कहां नहीं इसके लिए कोई स्पष्ट नियम नहीं हैं।

बंद करवाए गए स्टोन क्रशर
गंगोत्री नेशनल पार्क के निदेशक डा.आईपी सिंह ने बताया कि उन्होंने निर्माण एजेंसी पर 4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। नागा से आगे बार्डर पर कार्य कर रही सीपीडब्लूडी के अधीन काम करने वाले कंपनी का स्टोन क्रशर बंद कर दिया। अवैध खनन रोक कर उससे भी एक लाख रुपये का जुर्माना वसूला है।

ध्वनितरंगों ने पहले भी पहुंचाया था नुकसान
मंगलाछू ताल उत्तरकाशी से दूर हर्षिल से 5 किमी ऊपर 12 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इसके पास जा कर सीटी मारने से सतह की रेत से पानी के बुलबुले निकलने लगते हैं। बीते साल गंगोत्री राजमार्ग के डब्बललेन निर्माण में देवीधार पहाड़ी को काटने के लिए किए विस्फोटकों से निकली ध्वनि तरंग के कंपन से सड़क की दूसरी ओर कई मकान दुकान ध्वस्त हो गए। एसडीएम डुंडा ने अपनी रिपोर्ट में भी इसका खुलासा किया।

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