पांच गांवों के वोटरों ने नहीं डाले वोट

Uttar Kashi Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी/घनसाली/चंबा। मांगों को लेकर मुखर ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार भी किया। सूरी तराकोट गांव में तो किसी तरह दो वोट पड़ गए, लेकिन जखारी व पोखरी गांव से ईवीएम खाली लौटी। इसी तरह, घनसाली के पिपोला गांव में भी 475 ग्रामीणों में से एक भी वोट डालने नहीं आया। चंबा ब्लाक के मख्ल्वाणु और भेदुड़ी के ग्रामीणों ने भी वोट से अपने को अलग रखा।
जिला मुख्यालय के निकटवर्ती गंगोत्री विधानसभा क्षेत्र के पोखरी गांव के लिए एनआईएम बैंड से महज एक किमी की सड़क बननी है। इस मामले में प्रगति न होने से खफा 147 मतदाताओं वाले इस गांव ने मतदान का बहिष्कार कर डाला। गांव के कैप्टन लक्ष्मण सिंह नेगी, जमन सिंह राणा, बलवीर कैंतुरा, अतर सिंह राणा आदि ने कहा कि जब सरकार मांगों की सुनवाई ही न करे तो वोट देकर क्या फायदा? इसी विधानसभा के जखारी गांव में भी ग्रामीणों ने सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा दिया। 141 मतदाताओं वाले इस गांव से भी ईवीएम खाली लौटी। उधर यमुनोत्री विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सूरी, तराकोट व दारगढ़ के ग्रामीणों ने भी सड़क की मांग को लेकर चुनाव का बहिष्कार किया। इन तीनों गांवों के कुल 507 मतदाताओं का मतदान केंद्र सूरी गांव में बनाया गया था। यहां ईवीएम में बीएलओ व एक अन्य ग्रामीण को छोड़ किसी ने भी वोट नहीं डाला। गांव के पूर्व प्रधान रणवीर सिंह, मोहन लाल, जगवीर आदि ने कहा कि वे 1970 से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
पिपोला में टिहरी बांध से प्रभावित ग्रामीणों ने पूर्ण विस्थापन और घोंटी-पिपोला पुल निर्माण की मांग न माने जाने पर बहिष्कार का कदम उठाया। ग्रामीणों ने कहा कि टिहरी बांध की झील भरने पर जलस्तर गांव तक पहुंच गया, जिससे 50 फीसदी से अधिक उपजाऊ भूमि झील में डूब गई। आवागमन की भी बड़ी समस्या है। वर्ष 2005 में झील बनने के बाद से घोंटी-पिपोला हल्का वाहन पुल नहीं बन पाया है, जिससे ग्रामीणों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिलखी पहुंचने के लिए 14 किमी का सफर तय करना पड़ता है। गांव के प्रधान विनोद बडोनी, मायाराम बडोनी, राम दयाल, गुरु प्रसाद बडोनी, कौशल्या देवी, ममता देवी, सुमति और राजू कंसवाल ने कहा कि मांग नहीं मानी गई, तो वे किसी भी चुनाव में वोट नहीं डालेंगे।
चंबा-मख्ल्वाणु-भेदुड़ी मोटर मार्ग निर्माण की मांग को लेकर ग्राम पंचायत पुरसोल गांव के अंतर्गत पड़ने वाले मख्ल्वाणु व भदुड़ी के ग्रामीणों ने भी लोकतंत्र के महापर्व में हिस्सा नहीं लिया। सड़क निर्माण न होने से आक्रोशित उक्त दोनों गांवों के मतदाता वोट डालने नहीं गए। जबकि उक्त गांव पंचायत के उनियाल व पुरसोल गांव के लोगों ने मतदान किया। मख्ल्वाणु गांव में 85 व भेदुड़ी गांव में 180 मतदाता थे, जिन्होंने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। ग्राम प्रधान भगवान सिंह कुंवर का कहना है कि ग्रामीण कई दशकों से सड़क की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें झूठे दिलासे दिए जाते हैं।

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