जलवायु परिर्वतन की मार सबसे ज्यादा किसानों पर

Uttar Kashi Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। जलवायु परिर्वतन की मार सबसे अधिक किसानों और गरीबों पर पड़ रही है। कारण इस तबके का प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर होना है। सरकारी विभाग सिर्फ आंकड़ेबाजी में जुटे हैं। मौसम के अनुसार खेती-बागवानी में बदलाव की कोई योजना अब तक तैयार नहीं हो पाई है। यह स्थिति हिमालय क्षेत्र की कृषि बागवानी के लिए बड़ा खतरा है।
हार्क नौगांव में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर हुई कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों की ऐसी राय निकल कर सामने आई। वक्ताओं ने कहा कि मसूरी और नैनीताल में मौसम विज्ञान केंद्र खोलने के प्रस्ताव ठंडे बस्ते में हैं। जल विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक भागीरथी नदी में 100 साल के औसत वाटर डिस्चार्ज में किसी तरह का बदलाव न होने की जानकारी देते हैं। जबकि हकीकत ये है कि बारिश, बर्फबारी और जाड़े का मौसम आगे खिसक रहा है। बारिश भी पहले की अपेक्षा कई गुना तो हो रही है, लेकिन इससे फसलें प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों ने खेती पर जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए शोध की जरूरत बताई। इस मौके पर पद्मभूषण चंडी प्रसाद भट्ट, डा.दिनेश प्रताप सिंह, डा.मोहन पंवार, केएन तिवारी, महेंद्र कुंवर आदि मौजूद थे।

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