पहले डंडे के बल पर घर खाली कराए, अब प्रभावित मानने को भी राजी नहीं

Uttar Kashi Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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केस-1
जोशियाड़ा में भगवान सिंह भंडारी के मकान की निचली मंजिल में पानी व मलबा घुसने के बाद मकान मालिक समेत सभी किराएदार सामान समेट कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। राहत की बारी आई तो निचली मंजिल वाले जय सिंह को तो अहेतुक सहायता मिली, लेकिन इसी मकान की ऊपरी मंजिल में रहने वाले विनोद भट्ट, द्वारिका प्रसाद आदि को कोई राहत नहीं मिली।

केस-2
लोकेंद्र भट्ट का मकान असी गंगा का मलबा घुसने से बर्बाद हो चुका है। लेकिन, प्रशासन ने इस मकान को आंशिक क्षतिग्रस्त की श्रेणी में भी नहीं रखा है। जब इस परिवार ने मलबा साफ कर वहां रहने की कोशिश की तो उन्हें घर में न घुसने की चेतावनी दी गई। प्रशासन ने इस परिवार को मात्र 2700 रुपये अहेतुक सहायता देकर चलता कर दिया।

उत्तरकाशी। यह दोनों मामले प्रशासन के मनमाने मानकों को बयां करने के लिए काफी हैं। ऐसे ही नियम और मानक आपदा प्रभावितों के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं। हालांकि, यह नियम सिर्फ उन लोगों के लिए हैं जो नियमों का पालन करते हैं। ऐसा नहीं होता तो डीएम को खरादी मामले में जांच नहीं बैठनी पड़ती।
तकलीफ यह है कि जिन भवनों को खतरनाक मानते हुए डंडे के बल पर खाली कराया जा चुका है उन्हें अब प्रशासन कागजों पर असुरक्षित या क्षतिग्रस्त मानने का तैयार नहीं है। इन घरों में रहने वाले लोग शरणार्थी बन गए हैं, लेकिन प्रशासन की नजर में ये लोग प्रभावित नहीं हैं। ऐसे भी कई मामले सामने आएं हैं जिनमें एक ही मकान में रहने वाला एक परिवार प्रभावित तो दूसरा नहीं। यूं तो मुख्यमंत्री ने बाढ़ से बेघर हुए परिवारों को छह महीने तक 2-2 हजार रुपये किराया देने की घोषणा की है, लेकिन प्रभावितों को चिह्नित करने की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। फिलहाल प्रशासन विभिन्न मदों में ढाई करोड़ की सहायता राशि बांटने के बाद अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं आपदा का दंश झेल रहे लोग शंका भरी नजरों से अधिकारियों की ओर देख रहे हैं।

नुकसान के बावजूद प्रभावित नहीं
उत्तरकाशी। जोशियाड़ा डूब क्षेत्र वाली बस्ती में रहने वाले दिनेश बडोनी, विनोद भट्ट, अनीता रमोला, देशबंधु भट्ट, द्वारिका प्रसाद आदि का कहना है कि बाढ़ के दौरान मची अफरा-तफरी में घरों से निकाला गया सामान बारिश से खराब हो गया। हम अब तक शरणार्थियों की तरह भटक रहे हैं, लेकिन प्रशासन की नजर में हम प्रभावित नहीं हैं। उधर, प्रशासन ने भटवाड़ी प्रखंड में अहेतुक सहायता मद में 854 परिवारों को 41 लाख 47 हजार रुपये बांटे। मुख्यमंत्री राहत कोष से आपदा में बेघरबार हुए मात्र 15 लोगों को किराए के तौर पर 66 हजार रुपये दिए गए। इनमें कई लोगों को एडवांस किराया भी मिला है। हालांकि, गड़बड़ी के आरोप भी लग रहे हैं।

ऐसे ही हैं मानक
उत्तरकाशी। आपदा राहत कार्य देख रहे एडीएम बीके.मिश्रा का कहना है कि अहेतुक सहायता के मानक ही ऐसे हैं कि जिन कमरों में पानी भरा है उनमें रहने वालों को ही इसके दायरे में लिया जाए। असुरक्षित भवनों को लेकर शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है।

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