भंडारस्यूं के वाण गांव में भी फटा बादल, मची तबाही

Uttar Kashi Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी/चिन्यालीसौड़। शुक्रवार की रात को भंडारस्यूं के वाण मंजगांव के ऊपर पहाड़ी पर बादल फटने से सूखे गदेरों में उफान आने से खुरमोला गाड तक दो हजार नाली खेतों में खड़ी धान, झंगोरा, मंडुआ, सब्जी की फसल समेत खेत तबाह हो गए। वाण गांव के ऊपर दरार आने के साथ ही गांव के कई भवनों में भी दरारें आ गई हैं। मंजगांव इंटर कालेज का एक हिस्सा बह गया। सिल्क्यारा-बणगांव मार्ग का एक हिस्सा भी आपदा की भेंट चढ़ा।
शुक्रवार रात को मूसलाधार बारिश के बीच 2.30 बजे बादल फटने से लोगाें ने दहशत में रात गुजारी। आपदा में गांव की पेयजल लाइन बह गई। कई बिजली के खंबे गिरने से आपूर्ति ठप हो गई। गांव के संपर्क मार्ग एवं पनघट बहने से लोग पशुओं को चरान चुगान के लिए भी नहीं ले जा पा रहे हैं। सूखे बुढान नाले में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने से वाण गांव से नीचे की ओर खुरमोला गाड तक लगे महरगांव, सिल्क्यारा, मांडियासारी, स्यालना आदि गांवों की खेती भी नष्ट हो गई।
ग्रामीणों की सूचना पर धरासू के थाना प्रभारी मनोहर भंडारी, आपदा प्रबंधन दल के दिनेश रावत एवं ब्रह्मखाल चौकी स्टाफ ने गांव पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। वाणगांव के अनिल अवस्थी, मुरारीलाल, शिवराम, शिव प्रसाद तथा गांव पहुंचे ब्रह्मखाल के सामाजिक कार्यकर्ता महावीर सिंह रावत ने कहा कि खेत एवं फसल बर्बाद होने के साथ उपला वाण गांव पर भूस्खलन का खतरा मंडरा रहा है। यहां भू वैज्ञानिकों की टीम भेजकर सर्वे कराने की जरूरत है।
सड़क खुलने और बंद होने का सिलसिला
उत्तरकाशी। धरासू नालूपाणी में अवरुद्ध गंगोत्री राजमार्ग पर 18 घंटे बाद शनिवार दोपहर एक बजे यातायात बहाल हो पाया। पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी की वापसी को देखते हुए बीआरओ ने यहां भारी मशक्कत कर शनिवार दोपहर एक बजे यातायात बहाल किया। लेकिन बारिश के साथ भूस्खलन जारी रहने से यहां कभी भी यातायात पर ब्रेक लगने की स्थिति बनी हुई है।
सुरक्षा कार्य की धीमी चाल से प्रभावित भयभीत
बड़कोट। यमुनोत्री राजमार्ग पर स्थित खरादी कस्बे में तीन सप्ताह बाद भी सिंचाई विभाग यमुना नदी का पानी डायवर्ट करने में नाकाम रहा है। इस धीमी चाल से आपदा प्रभावित भयभीत है। नदी के कटाव से खरादी कस्बा खतरे की जद में है।
तीन अगस्त को यमुना नदी के उफान से खरादी कस्बे में भारी तबाही हुई थी। कई अवसीय भवन, होटल एवं ढाबे बह गए थे। प्रभवितों एवं आपदा की जद में आए पीड़ितों ने नदी को दूसरी ओर डायवर्ट कर वायरक्रेट के तत्कालीन इंतजाम की मांग की थी। कर्णप्रयाग के विधायक डा.अनुसूया मैखूरी ने शासन-प्रशासन से वार्ता कर 20 वायरक्रेट के जाल और नदी डायवर्ट करवाने की व्यवस्था की थी। परंतु आलम यह है कि सिंचाई विभाग यह काम नहीं कर पाई। डीएम के निर्देश के बावजूद न तो कार्य में तेजी लाई और न ही मोरी के तहसीलदार को बड़कोट लाया गया। कांग्रेस के जिला महामंत्री आनंद सिंह राणा ने सुरक्षा कार्य में धीमी गति को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 28 अगस्त को मुख्यमंत्री के भ्रमण के दौरान उनके समक्ष लापरवाह अधिकारियों की सूची रखी जाएगी।

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