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गृह अनुदान के नाम पर चल रहा बड़ा खेल

Uttar Kashi Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
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यह शोध का विषय है कि कुदरती आपदा भले ही क्षेत्र विशेष के बाशिंदों के लिए मुसीबतों का पैगाम लेकर आए पर इंतजामकारों के लिए खुशखबरी लेकर आती है। सरकार तो मदद के लिए अपने तौर पर दिल और खजाना दोनों खोल देती है लेकिन जिनके ऊपर पीड़ितों को राहत देने का जिम्मा है उन्हीं के ऊपर बंदरबांट का आरोप लगता है। उत्तरकाशी में भी यह हो रहा है। स्थानीयों का आरोप है कि स्थान बदलने के साथ राहत देने के मानक भी बदल रहे हैं। हैरत की बात यह है कि अफसर भी खुद को ‘हरिश्चंद’ बताने से नहीं चूक रहे। राहत बांटने में अनियमितता के आरोपी एक तहसीलदार तो यह भी दावा कर रहे कि उनकी जेब में किसी ने 10 हजार की रिश्वत डाल दी थी जिसे उन्होंने सार्वजनिक रूप से लौटा दिया। खैर जो भी हो राहत पाना सब कुछ अफसर के ‘मूड’ पर निर्भर है।
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d पंकज गुप्ता
उत्तरकाशी। गृह अनुदान के नाम पर उत्तरकाशी में बड़ा खेल चल रहा है। खरादी कस्बे में सामने आया मामला इसे साबित करने के लिए काफी है। खरादी में जहां मानकों को ताक पर रखकर दिल खोलकर राहत राशि बांटी गई, वहीं जिला मुख्यालय समेत अन्य क्षेत्रों में मानकों की आड़ में असल प्रभावितों को भी छोड़ दिया गया। एक ही जिले में अलग-अलग मानक को लेकर लोग हैरान और परेशान हैं। बड़कोट के खरादी कस्बे में दर्जन भर व्यवसायिक भवनों की एवज में 37 लोगों को गृह अनुदान के रूप में एक-एक लाख रुपये के चेक थमाए जा चुके हैं। जबकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 12 पक्के गैरआवासीय भवन और चार खोखे थे। इनमें भी सरकारी भूमि पर निर्माण के चलते कइयों के चालान काटे गए थे। तीन अगस्त की आपदा में यहां कई मकान बहे, जबकि छह भवन क्षतिग्रस्त हैं। मानकों के अनुसार व्यवसायिक भवनों के लिए क्षतिपूर्ति दी ही नहीं जा सकती। सवाल यह है कि आवासीय भवन न होने के बावजूद 37 लोगों को किस आधार पर चेक दिए गए। यही नहीं, यहां एक ही मकान में रह रहे भाइयों को अलग-अलग एक-एक लाख रुपये के चेक दे दिए गए। जिला मुख्यालय, गंगोरी व भटवाड़ी क्षेत्र में यह मानक उलटा है। गंगा घाटी में संगमचट्टी से गंगोरी तथा भटवाड़ी से जिला मुख्यालय तक प्रशासन महज 77 भवन पूर्ण क्षतिग्रस्त चिह्नित कर प्रति मकान के हिसाब से 1-1 लाख रुपये गृह अनुदान दे रहा है। जबकि इनमें कई बहुमंजिले आवासीय भवनों में भाइयों के परिवार अलग-अलग रहते थे। यहां व्यवसायिक भवनों को तो गिना ही नहीं जा रहा है।
कैसे-कैसे तर्क
राहत वितरण कार्य देख रहे एडीएम बीके.मिश्रा ने बताया कि एसडीएम बड़कोट द्वारा भेजी गई सूची के आधार पर ही गृह अनुदान का वितरण किया गया है। खरादी वाले मामले की जांच चल रही है। वहीं, एसडीएम बड़कोट परमानंद राम ने कहा कि राजस्व की टीम द्वारा खरादी में क्षतिग्रस्त भवनों की सूची तैयार की गई। व्यवसायिक भवनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 1-1 लाख रुपये देने संबंधी शासनादेश की प्रत्याशा में यहां 38 व्यवसायिक भवन स्वामियों को भुगतान किया गया।

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