सदमे ने महेंद्र को पहुंचाया अस्पताल

Uttar Kashi Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। बाढ़ में सबकुछ बह गया, लेकिन सहायता मिलना तो दूर प्रभावितों की सूची में नाम तक नहीं। सूची देखी तो ऐसा सदमा लगा कि आंख अस्पताल में जाकर खुली। यह दुख भरी कहानी है जन्म से गूंगे महेंद्र सिंह की।
उत्तरों गांव के कैर सिंह के दो बेटे हैं। एक भारतीय सेना में और दूसरा महेंद्र घर पर ही रहता है। खेती करने वाले महेंद्र ने अपनी मेहनत के बल पर भाई के साथ मिलकर गंगोरी में दो हिस्सों में तीन मंजिला मकान तथा दो दुकानें बनाई। तीन अगस्त की रात दोनों भाइयों के परिवार कहीं और होने से बच गए, लेकिन सामान व मकान बह गया। राजस्व विभाग ने जब प्रभावितों की सूची तैयार की तो पिता कैर सिंह व फौजी बेटे विरेंद्र सिंह के नाम एक लाख रुपये गृह अनुदान का संयुक्त चेक थमा दिया। महेंद्र सिंह का इस सूची में उल्लेख ही नहीं है। उन्हें गृह अनुदान तो दूर किराएदारों को बांटी जा रही अहेतुक सहायता तक नहीं दी गई। अब इस सदमे में बीमार हुए महेंद्र सिंह का अस्पताल में इलाज चल रहा है। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राहत की गाइड लाइन में पिता के साथ साझी संपत्ति एक ही मानी जाएगी।

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