आपदा नहीं लापरवाही है देरी कारण

Uttar Kashi Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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उत्तरकाशी। मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना ठप होने का कारण भले ही कुदरती है, लेकिन दुबारा बिजली उत्पादन शुरू न हो पाने के कारण अधिकारियों की लापरवाही है। लापरवाही इसलिए कि परियोजना की टेल रेस चैनल पर जमा रेत को हटाने के लिए पानी खींचने वाले सामान्य पंपों का इस्तेमाल हो रहा है। जबकि इस काम के लिए जेटिंग पंप का प्रयोग होता तो स्थिति कुछ और होती। साथ ही जो तरीका स्टेज टू में कामयाब रहा, वह भी यहां नहीं अपनाया गया।
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तीन अगस्त को भागीरथी की बाढ़ से मनेरी भाली प्रथम चरण व स्टेज टू दोनों परियोजनाओं की टीआरसी रेत से पट गई थी और इनके गेट भी जाम हो गए थे। 304 मेगावाट की स्टेज टू परियोजना में किसी तरह टरबाइन शुरू करके टीआरसी से रेत हटाई गई और बीते 9 अगस्त से यहां व्यवस्थित ढंग से 200 मेगावाट उत्पादन लिया जा रहा है। रेत हटाने का यह तरीका भी प्रथम चरण परियोजना में नहीं अपनाया गया, बल्कि यह काम ठेके पर दे दिया गया। जानकारों का कहना है कि निगम का ठेकेदार सामान्य पंप की बजाय जेटिंग पंप का इस्तेमाल करता तो दो दिन में ही रेत साफ की जा सकती थी।
जल्द शुरू होगा उत्पादन
उत्तरकाशी। जल विद्युत निगम के ईई केएल मित्तल ने स्वीकारा कि ठेकेदार के पास जेटिंग पंप न होने पर निगम द्वारा अपने सबमर्सिबिल पंप देकर रेत हटवाई जा रही है। एक-दो दिन के भीतर रेत हटाकर उत्पादन शुरू कर लिया जाएगा।
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