भूख, भय और अंधेरे में लोग

Uttar Kashi Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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उत्तरकाशी। सड़क मार्ग बहाल होने पर अभी काफी समय लग सकता है। ऐसे में भटवाड़ी से आगे लोगों के सामने दैनिक उपयोग की वस्तुएं न मिलने का भी संकट खड़ा हो गया है। करीब 15 हजार से ज्यादा आबादी वाले इस क्षेत्र में आटा, चावल, चीनी, चायपत्ती, नमक, मिट्टी का तेल न मिलने से कई परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति आ सकती है।
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गंगोत्री यात्रा मार्ग पर फंसे तीर्थयात्रियों को तो प्रशासन ने वायुसेना के हेलीकाप्टरों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाल दिया है। लेकिन यातायात बहाल न होने से अब हर्षिल टकनौर क्षेत्र के लोग भूख, भय और अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। नेलंग गंगोत्री राजमार्ग कई स्थानों पर टूटा है। बिजली की लाइनें भी क्षतिग्रस्त हैं। भटवाड़ी से आगे बगोरी हर्षिल तक अंधेरा पसरा है। बिजली, डीजल और मिट्टी तेल की सप्लाई न होने से संचार सेवाएं भी ठप हैं। बंद पड़ी लोहारीनाग-पाला तथा पाला-मनेरी परियोजना से प्रभावित लोग भूस्खलन और उफनते नालों से सो नहीं पा रहे हैं। यात्रा बंद होने से गंगोत्री में भी सन्नाटा पसरा है। दुकानदार दुकानें समेट कर लौट रहे हैं। वहां सिर्फ मंदिर समिति, आश्रम, धर्मशाला संचालक एवं साधु-संतों समेत महज डेढ़ सौ लोग ही रह गए हैं। वहां भी जरूरी सामान की किल्लत है। शासन-प्रशासन गंगोरी और स्वारीगाड में वैली ब्रिज लगाने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक करने का कार्य युद्ध स्तर पर चलाने की बात कह तो रहा है, लेकिन अलग-थलग पड़ी आबादी तक रसद जैसे जरूरी सामान पहुंचाने को लेकर चुप्पी साधे हुए है।
गंगोरी से आगे अंधेरा
उत्तरकाशी। अतिवृष्टि से बंद 200 किलोवाट की हर्षिल लघु जल विद्युत परियोजना को स्थानीय लोगों ने श्रमदान कर चालू कर दिया है। हर्षिल, धराली और मुखबा गांव के 80 से ज्यादा लोगों ने 15 मीटर तक पावर चैनल में जमा रेत के ढेर हटाकर टरबाइनों तक पानी पहुंचाया। इससे इन तीन गांवों का अंधेरा तो दूर हो गया, लेकिन ग्रिड की लाइन से जुड़े हर्षिल हेलीपैड वाले बगोरी से लेकर सुक्की, झाला, जसपुर, पुराली, कुज्जन, भंगेली आदि कई दर्जन गांवों में अब भी अंधेरा पसरा है। ऊर्जा निगम के एई आरएल रतूड़ी ने स्वीकार किया कि भटवाड़ी तक भी विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हो पाई है। चड़ेती, गंगनानी सहित कई जगह लाइन क्षतिग्रस्त पड़ी है। जिसे दुरुस्त करने में समय लगेगा।

घरों में दुबक जाते हैं लोग
उत्तरकाशी। सुक्की की प्रधान एकादशी देवी तथा कुज्जन के रघुवीर सिंह का कहना है कि अंधेरे के कारण लोग सांझ ढलते ही अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं। रात के अंधेरे में बारिश होने पर भूस्खलन के खतरे तथा गाड-गदेरों में उफान के शोर में लोग सो भी नहीं पाते।
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