राहत शिविरों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला

Uttar Kashi Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। नगर क्षेत्र में प्रभावित परिवारों के लिए खुले राहत शिविरों में रविवार को अव्यवस्थाएं हावी रही। 124 परिवारों के 576 प्रभावितों वाले छह शिविरों में प्रशासन ने नाश्ते के नाम पर 400 बिस्कुट के पैकेट थमाए तो जाआइसी जोशियाड़ा में 13 परिवारों के बच्चों के हिस्से के मिड डे मील की राशन से बना भोजन आया।
सभी राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, विद्युत एवं सफाई की सुचारु व्यवस्था के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। आपदा में अपने परिवार के सदस्य तथा जमीन-मकान आदि संपत्ति गवांने वाले कई लोग गंगोरी में जल विद्युत निगम की कालोनी में रह रहे हैं। यहां पेयजल तथा शौचालय का अस्थायी इंतजाम तक नहीं कराया गया है। 45 परिवारों वाले इस राहत शिविर में बिजली की व्यवस्था भी नहीं है।
प्रशासन ने रविवार को गंगोरी में प्रभावितों को 12 कट्टे आलू बांटे तथा हेलीकाप्टर से मोरी प्रखंड के लिवाड़ी, फिताड़ी में चार कुंतल खाद्यान्न के 27 पैकेज भिजवाए। जिला पूर्ति अधिकारी से प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 किलो चावल तथा गेहूं पिसा कर 10 किलो आटा देने को कहा गया है। अब प्रभावित समझ नहीं पा रहे हैं कि कब गेहूं की पिसाई होगी और कब आटे की रोटी बनाकर खाएंगे।

आपदा प्रबंधन नाकाम: गोपाल
उत्तरकाशी। आपदा के बाद से ही प्रभावित क्षेत्रों का पैदल दौरा करने में जुटे गंगोत्री के पूर्व विधायक गोपाल रावत ने कहा कि जब नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत चल रहे राहत शिविरों में इस तरह की अव्यवस्था है तो गांवों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार का आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह नाकाम रहा है।

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