डीजल-पेट्रोल की आपूर्ति हुई बहाल

Uttar Kashi Updated Wed, 08 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। गंगोत्री राजमार्ग जगह-जगह अवरुद्ध होने के कारण चार दिन बाद लंबगांव होते हुए डीजल-पेट्रोल के टैंकर उत्तरकाशी पहुंचने पर पेट्रोल पंप पर ईंधन की आपूर्ति बहाल हो पायी। यहां दुपहिया एवं चौपहिया वाहनों में ईंधन भरवाने के लिए लोगों की कतारें लग गईं। फिलहाल आपदा की स्थिति तथा राहत कार्यों में ईंधन की जरूरत को देखते हुए कम मात्रा में ही आपूर्ति की जा रही है।
पानी के लिए अब भी हाहाकार की स्थिति
उत्तरकाशी। पांचवें दिन भी आपदा प्रभावित जिला मुख्यालय, गंगोरी, ज्ञानसू आदि क्षेत्रों में जलापूर्ति बहाल नहीं हो पाई है। हालांकि टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन यह प्रभावित आबादी के अनुरूप नहीं है। जिससे हाहाकार वाली स्थिति है।
पेयजल आपूर्ति वाली असी गंगा में शुक्रवार को आई बाढ़ में पाइप लाइन तबाह होने से जिला मुख्यालय और आसपास के क्षेत्रों की जलापूर्ति ठप हो गई थी। हालांकि प्रशासन टैंकरों से जलापूर्ति के प्रयास तो कर रहा है, लेकिन यह नाकाफी ही साबित हो रहे हैं। पानी की किल्लत वाले क्षेत्रों में लोगों को हैंडपंपों पर दिन-रात लाइनें लगाकर पानी भरना पड़ रहा है। तीन दिन से मौसम खुला रहने के बावजूद जलापूर्ति बहाल न होने से लोगों में रोष है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता आरएस नेगी ने बुधवार तक असी गंगा के निकटवर्ती गदेरे से चार इंच की लाइन जोड़कर नलों में आंशिक जलापूर्ति बहाल करने तथा कुछ दिनों में यहीं से आठ इंच लाइन डालकर स्थिति को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि टिहरी और पौड़ी से दो और टैंकर आने के बाद अब नौ टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है।
पीड़िताें की मदद को आगे आया आईएजी
उत्तरकाशी। राष्ट्रीय स्तर पर गठित स्वयंसेवी संगठनों के समूह इंटर एजेंसी ग्रुप(आईएजी) की जिला इकाई अब आपदा प्रभावितों की पैरोकारी और जरूरी मदद के लिए आगे आई है। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, भुवनेश्वरी महिला आश्रम और हार्क सहित कई प्रतिष्ठित संगठनों ने क्षेत्र में जाकर प्रभावितों का चिह्नीकरण और उनके लिए जरूरी मदद की फेहरिस्त तैयार करनी शुरू कर दी है।
मंगलवार आईएजी के जिला संयोजक एसबीएमए के गोपाल थपलियाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि उनके ग्रुप के पास 150 कार्यकर्ता हैं। सहायता देने वाली एजेंसियां भी उनके संपर्क में हैं। ग्रुप चाहता है कि प्रशासन के साथ समन्वय कर प्रभावितों की जरूरतों की प्राथमिकता तय कर मदद पहुंचाई जाए। इसके लिए वे सर्वाधिक आपदा प्रभावित संगमचट्टी क्षेत्र के सात गांवों में प्रशासन को मानव संसाधन भी देने को तैयार हैं। यदि प्रशासन की उनकी मदद नहीं चाहेगा तो ग्रुप स्वयं प्रभावितों की मदद के लिए आगे बढ़कर कार्य करेगा।
आईएजी ने नगर क्षेत्र में लगाए गए 13 राहत शिविरों का निरीक्षण भी किया। यहां दाल-भात के साथ ही प्रभावितों को कुछ भी नहीं मिल रहा है। जबकि शिविर में बीमार, बच्चे, महिलाओं सहित कई शारीरिक एवं मानसिक रूप से बीमार विकलांग भी हैं। मात्र तीन शिविरों में ही अब तक मेडिकल टीम गई है। कई शिविरों ने पानी-बिजली का इंतजाम ही नहीं है तो कई जगह लोग स्वयं ही खाने की व्यवस्था कर रहे हैं। आईएजी ने इसकी रिपोर्ट डीएम को सौंपी तो है, देखना है कि इस पर क्या कार्रवाई होती है।

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