उत्तरकाशी नगर पर भी खतरे के बादल

Uttar Kashi Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। भले ही अब असी गंगा और भागीरथी का जलस्तर घटने से लोगों को कुछ राहत है। लेकिन जिस तरह से जगह-जगह गंगा भागीरथी का प्रवाह पथ बदला है, उससे कई और जगह खतरा बढ़ गया है। शनिवार को ढही तिलोथ पुल की एप्रोच रोड वाले हिस्से में कटाव बढ़ने से यहां गहराई में बसी वाल्मीकि बस्ती खतरे में आ गई है। जड़ भरत घाट वाले छोर पर नदी के पानी का दबाब बढ़ने से यहां एक मकान क्षतिग्रस्त हो गया है। दोबारा पानी बढ़ने पर भागीरथी यहां अन्य मकानों को ढहा कर अब तक सुरक्षित बचे उत्तरकाशी नगर को तबाह कर सकती है। नगर क्षेत्र के भागीरथी से अन्य हिस्सों में भी कई जगह सुरक्षा दीवार में कटाव होने से खतरा बढ़ गया है।
तिलोथ पुल की एप्रोच रोड तथा जोशियाड़ा झूला पुल तबाह होने के बाद फिलहाल जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए तांबाखानी सुरंग होते हुए ही इकलौता रास्ता बचा है। जोशियाड़ा वाले छोर पर टकराने के बाद गंगा-भागीरथी का बहाव की दिशा सीधे सुरंग के मुहाने वाले छोर पर टकरा रही है। जिससे वहां तेजी से सड़क का कटाव हो रहा है। यहां गंगोत्री राजमार्ग का पुश्ता ढहने और कटाव जारी रहने से उत्तरकाशी टापू बनकर रह जाएगा। जिससे संपर्क करने के लिए कोई रास्ता नहीं रह जाएगा। रविवार सुबह कटाव तेज होने पर यहां भारी वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। हालांकि अभी यहां यातायात चालू है, लेकिन सुरक्षा के त्वरित उपाय न किए जाने पर यहां सड़क कटने से जिला मुख्यालय तक वाहन तो क्या पैदल आवाजाही का माध्यम भी नहीं बचेगा। फिलहाल बीआरओ को भी यहां सड़क बचाने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा है।

हमेशा डेंजर जोन रहा तांबाखानी
उत्तरकाशी। ज्ञानसू एवं उत्तरकाशी के बीच तांबाखानी हमेशा से डेंजर जोन रहा है। यहां जरा भी बरसात भी कहर बरपाती रही है। वरुणावत हादसे के बाद उत्तरकाशी नगर को जोड़ने के लिए तांबाखानी के पास सुरंग बनाई गई थी। अब सुरंग के उत्तरकाशी की ओर वाले मुहाने पर तेजी से कटाव हो रहा है। जिससे शहर का संपर्क दूसरे भागों से कट जाएगा। अब तक शहर को जोड़ने के लिए इस मार्ग के साथ ही तिलोथ पुल और जोशियाड़ा झूला पुल भी थे। लेकिन वे दोनों ध्वस्त हो चुके हैं। बस गनीमत यह है कि इस आपदा में वरुणावत खामोश रहा। ऐसा नहीं होता तो स्थिति और विकट हो जाती।

आंशिक तौर पर बहाल हुई विद्युत आपूर्ति
उत्तरकाशी। शुक्रवार रात को भीषण बाढ़ की तबाही के साथ गुल हुई बिजली शनिवार रात को आंशिक तौर पर बहाल करने से लोगों को खासी राहत मिली। हालांकि अभी भी गंगोरी, जोशियाड़ा के बड़े हिस्से और ज्ञानसू समेत जिले के विभिन्न हिस्सों में विद्युत आपूर्ति ठप पड़े होने से रात के अंधेरे में बारिश के बीच नदी की गड़गड़ाहट भय का माहौल पैदा कर रही है। प्रशासन ने आपदा के तीसरे दिन पुलिस, आपदा प्रबंधन और आईटीबीपी को खतरे वाले स्थानों पर रोशनी के इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।
इनके मरने की हुई है पुष्टि
उत्तरकाशी। जिला प्रशासन ने बाढ़ में फायर सर्विस के जवान प्रेम सिंह, दीपक कुमार एवं बसंत कुकरेती, लोनिवि के कमलेश प्रसाद जोशी, संन्यासी शशि हाडर, उत्तरों निवासी जय सिंह, अमिता देवी और उनकी डेढ़ वर्ष की पुत्री की मौत की पुष्टि की है। डीएम ने जल विद्युत निगम द्वारा बहे बताए जा रहे मजदूरों के नाम की लिस्ट तलब की है।

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