प्रशासन जुटा राहत और बचाव में

Uttar Kashi Updated Sun, 05 Aug 2012 12:00 PM IST
उत्तरकाशी। जिले में भीषण आपदा की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने खतरे की जद में आई बस्तियों को खाली करवा दिया है। फिलहाल सरकारी मशीनरी भी ज्यादा कुछ करने की स्थिति में नजर नहीं आ रही है। प्रभावितों को राजकीय इंटर कालेज, बालिका इंटर कालेज, विकास भवन, नगर पालिका, राइंका जोशियाड़ा, बिड़ला धर्मशाला, गढ़वाल मंडल विकास निगम में ठहराने का इंतजाम किया है। सुरक्षा एवं बचाव कार्य में आईटीबीपी का सहयोग लिया जा रहा है। गंगोरी में वैली ब्रिज निर्माण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

पूरी तरह अलग-थलग पड़े
उत्तरकाशी। अगोड़ा और दंदालका गांव के छानियों में फंसे 65 परिवारों के साथ ही अब इस क्षेत्र के सात गांवों का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क कट गया है। संगमचट्टी से सेकू तथा आसपास के सभी पुल बाढ़ में ध्वस्त होने से अब यहां जरूरी राशन पहुंचाने की स्थिति न होने से भुखमरी की स्थिति आ सकती है। दूसरी ओर जोशियाड़ा झूला पुल ध्वस्त होने तथा तिलोथ मोटर पुल की एप्रोच कटने से अब निकटवर्ती बस्तियां जिला मुख्यालय से अलग-थलग पड़ती जा रही हैं। जोशियाड़ा, कंसैण, बाड़ागड्डी व विकासभवन क्षेत्र से जिला मुख्यालय आने-जाने वाले फिलहाल तांबाखानी की अंधेरी सुरंग से होकर खतरे की जद में जोशियाड़ा मोटर पुल से आवाजाही कर रहे हैं।

परियोजनाओं को नुकसान
उत्तरकाशी। यमुना और हनुमानगंगा में आए उफान से हनुमान गंगा पर बने 4.95 मेगावाट के पावर प्लांट का एक हिस्सा पानी के साथ मलबा घुसने से क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके साथ लगा 33 केवीए का विद्युत सब स्टेशन भी क्षतिग्रस्त हो गया है। गंगनाणी में यमुना के उफान से आठ मेगावाट की निर्माणाधीन परियोजना के पाइप आदि कई निर्माण बह गए। 200 किलोवाट की जानकीचट्टी परियोजना में भी बाढ़ से उत्पादन ठप हो गया है। दूसरी ओर असी गंगा पर निर्माणाधीन 9 मेगावाट की काल्दीगाड तथा 4.5-4.5 मेगावाट की असी गंगा प्रथम एवं द्वितीय चरण परियोजनाओं को भी बाढ़ में भारी नुकसान पहुंचा है। फिलहाल इन परियोजनाओं को पहुंची क्षति का आंकलन करने के लिए मौके पर पहुंचने की स्थति ही नहीं है।

जोशियाड़ा कस्बे पर मंडरा रहा तबाही का खतरा
उत्तरकाशी। बाढ़ से उखड़कर 140 मीटर स्पान के झूला पुल के टूटने से जोशियाड़ा कस्बा कभी भी तबाही के भंवर में फंस सकता है। बादल फटने को लेकर अतीत में उत्तरकाशी के लिए संवेदनशील रहे अगस्त और सितंबर माह में यदि इस तरह की आपदा की पुनरावृत्ति हुई तो भागीरथी में बहकर आने वाला मलबा पुल में फंसकर जोशियाड़ा की ओर हो रहे कटाव में तेजी ला सकता है। ऐसे में जोशियाड़ा के अब तक सुरक्षित बचे सैकड़ों घरों पर भागीरथी में समाने का खतरा मंडरा सकता है। इस स्थिति को देखकर शनिवार शाम से ही जोशियाड़ा बस्ती में अफरा-तफरी का माहौल है।
फिलहाल झूला पुल का जोशियाड़ा वाला स्तंभ उखड़ने से यह भागीरथी में झूल रहा है। रात में पानी बढ़ने पर बड़े पेड़ और बोल्डर फंसने से इसके दोनों छोर से उखड़ने का अंदेशा जताया जा रहा है। यह पुल नीचे की ओर जोशियाड़ा के मोटर पुल तथा मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना के बैराज गेटों को खतरा पैदा कर सकता है।




बकरिया टाप में फटा बादल, मची तबाही
उत्तरकाशी। शुक्रवार रात करीब 10 बजे दयारा बकरिया टाप के किसी हिस्से में बादल फटने से इस जलागम क्षेत्र से जुड़ी असी गंगा के साथ ही पापड़ गाड, स्वारी गाड और नहरी गाड पूरे उफान पर आ गई। इन गाड-गदेरों में बहकर आए हजारों पेड़ों और भारी बोल्डरों ने गंगा भागीरथी को जगह-जगह अवरुद्ध कर कृत्रिम झीलें तैयार कर दीं। इन झीलों के एक के बाद एक टूटने से चिन्यालीसौड़ तक के क्षेत्र में तबाही का मंजर पैदा कर दिया। रात साढ़े दस बजे जिला मुख्यालय क्षेत्र में गंगा खतरे के निशान से करीब पांच मीटर ऊपर तक बहने से यहां अफरा-तफरी मच गई। लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने के लिए दौड़ पड़े। इस दौरान बिजली के पोल और लाइनें क्षतिग्रस्त होने से शहर में अंधेरा छा गया। मकानों के ढहने का सिलसिला शनिवार तक भी जारी है।

पांच फुट तक भरा पानी
डुंडा में भागीरथी के किनारे 16 घरों में पांच फुट तक पानी घुसने से सारा सामान बर्बाद हो गया। घर में पानी आता देख लोग जान बचाने के लिए बाहर भाग कर गांव में शरण लेने पहुंचे। मातली में कुछ आवासीय भवनों तथा आईटीबीपी परिसर को भी नुकसान पहुंचा। रतूड़ी सेरा में गंगोत्री राजमार्ग का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है।

बिजली-पानी की आपूर्ति ठप
उत्तरकाशी। बाढ़ से बिजली के दर्जनों खंबे और कई किमी लाइनें ध्वस्त हो गई। ऐसे में जिले की विद्युत आपूर्ति शुक्रवार रात से ही ठप पड़ी है। इसे बहाल होने में अभी समय लगने की आशंका है। बाढ़ में कई पेयजल योजनाएं तबाह होने से अधिकांश जगह पेयजल का संकट गहरा गया है।

बिजली उत्पादन बंद
उत्तरकाशी। भागीरथी में आई बाढ़ ने 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण तथा 304 मेगावाट की स्टेज टू परियोजना में विद्युत उत्पादन ठप कर दिया है। बैराज के कुछ निर्माणों को भी बाढ़ से क्षति पहुंची है। ऐसे में इन परियोजनाओं से उत्पादन शुरू होने में अभी समय लगने की आशंका है।

यमुनोत्री- गंगोत्री की ओर फंसे 450 यात्री
उत्तरकाशी। यमुनोत्री तीर्थयात्रा मार्ग पर हनुमानचट्टी और जानकीचट्टी के बीच जंगल चट्टी में राजस्थान के 150 तीर्थयात्री फंसे हुए हैं। आगे पीछे भूस्खलन से क्षतिग्रस्त राजमार्ग के बीच कुछ ढाबों में रहकर इन यात्रियों को रात बितानी पड़ेगी। इससे पूर्व बाडिया गांव में सड़क धंसने से जानकीचट्टी में 12 यात्री बसें फंसी हैं। गंगोत्री में भी गंगोरी, चड़ेथी भटवाड़ी और गंगोत्री में करीब 300 यात्री फंसे हुए हैं। अभी इस क्षेत्र में रहने या खाने की कोई समस्या न होने से यात्रियों को ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ रही है।

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