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भारत-चीन सीमा की चौकसी पगडंडियों के सहारे करने को मजबूर हिमवीर

Dehradun Bureau Updated Tue, 17 Apr 2018 10:41 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगोत्री नेशनल पार्क की बंदिश और सरकारी बाबुओं की सुस्ती के चलते चीन के खिलाफ भारत की सामरिक तैयारियां पिछड़ती जा रही हैं। बीआरओ के बाद अब सीमावर्ती क्षेत्र में सड़क निर्माण की जिम्मेदारी संभालने वाला केंद्रीय लोनिवि डीपीआर और बजट पास कराने में तो दिलचस्पी दिखा रहा है, लेकिन नेशनल पार्क में सड़क निर्माण की अनुमति और इसके लिए वन भूमि हस्तांतरण की लंबी प्रक्रिया अभी तक शुरू नहीं की गई है।
जिले से लगी भारत-चीन सीमा पर चीन अपनी ओर सड़कें तैयार कर चुका है, जबकि हमारी ओर से गंगोत्री से नौ किमी पहले भैरोंघाटी से नीलापाणी, सुमला और मंडी तक ही सड़कें बनी हैं। इससे आगे नीलापाणी से मुनिंगला तक 34 किमी, मंडी से टीसांचकुला बॉर्डर तक 10 किमी और सुमला से थागला 12 किमी दूर सीमा की चौकसी दुर्गम पगडंडियों के सहारे करनी पड़ रही है। 3940 मीटर ऊंचाई वाले नीलापाणी से 5652 मीटर ऊंचाई वाले मुनिंगला पास तक की पगडंडी इतनी मुश्किल भरी है कि इसे लांघने में जवानों को तीन दिन से ज्यादा का समय लग जाता है। ऐसे में आईटीबीपी के हिमवीर एवं सेना के जवान भारी जोखिम के साथ सीमाओं की चौकसी करने को मजबूर हैं।
इन सीमावर्ती चौकियों तक सड़क निर्माण का प्रस्ताव सालों से फाइलों में ही घूम रहा है। बीआरओ के अनुरोध पर प्रमुख वन संरक्षक ने 30 मई 2015 को ही प्रस्तावित सड़क के सर्वेक्षण की अनुमति विभाग को सौंप दी थी, लेकिन अभी तक इस पर आगे की कार्रवाई नहीं हुई। पार्क प्रशासन का कहना है कि सर्वेक्षण के बाद सड़क निर्माण का प्रस्ताव आएगा। तब प्रमुख वन संरक्षक से परीक्षण के बाद इसे राज्य वन्य जीव परिषद में रखा जाएगा। यहां से पास होने के बाद शासन इसकी स्वीकृति के लिए राष्ट्रीय वन्य जीव परिषद को भेजेगा। इसकी स्वीकृति के बाद फिर अलग से वन भूमि हस्तांतरण के भी यही प्रक्रिया अपनानी होगी। इसमें करीब तीन साल से ज्यादा का समय लगेगा।
कोट...
अभी तक सड़क निर्माण की अनुमति और भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई तो दूर, प्रस्तावित सड़क के सर्वेक्षण संबंधी कोई पत्र भी हमें संबंधित विभाग से नहीं मिला है। स्वीकृति की इस प्रक्रिया में तीन साल से ज्यादा का समय लगता है।
श्रवण कुमार, उपनिदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क।
कोट...
गंगोत्री नेशनल पार्क के भीतर भारत-चीन सीमा पर तीन सड़कों के निर्माण की डीपीआर दिसंबर 2017 में तैयार कर गृह मंत्रालय को भेजी गई है। सड़क की तकनीकी एवं बजट स्वीकृति की कार्रवाई गतिमान है। नेशनल पार्क संबंधित कार्रवाई शासन स्तर पर चल रही है।
विनोद सिंह, कार्यपालक अभियंता, केंद्रीय लोनिवि

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