भारत-नेपाल सीमा पर आने लगे साइबेरियन मेहमान      

ओम प्रकाश मौर्य/ऊधमसिंह नगर Updated Mon, 26 Nov 2018 12:25 AM IST
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siberian birds
siberian birds - फोटो : प्रतीकात्मक फोटो।

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भारत-नेपाल सीमा पर स्थित शारदा सागर में साईबेरियन पक्षियों का आगमन शुरू हो गया है। साईबेरिया में जब बर्फ जमने लगी है तो इन पक्षियों के सामने चारे का संकट पैदा होता है और वह भारत का रुख करते हैं और विभिन्न जलाशयों में विचरण करते हैं। साईबेरियन पक्षियों के गर्म तासीर के होने के कारण वन विभाग की तमाम सुरक्षा के बावजूद शिकारी इन पक्षियों का भारी मात्रा में शिकार कर आसपास के क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी देश नेपाल में बिक्री करते हैं।        
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साईबेरिया से हजारों मिल का लंबा सफर तय कर भारत आने वाले मेहमान पक्षी नेपाल सीमा पर एक तिहाई उत्तराखंड और दो तिहाई उत्तर प्रदेेश की भूमि पर स्थित शारदा सागर में लाखों की संख्या में आते हैं। यह पक्षी मार्च के प्रथम सप्ताह तक अपने मुल्क को लौटने लगते हैं। इधर, नेपाल सहित दो प्रदेशों की सीमा के मध्य होने के कारण इन पक्षियों का शिकार भी अधिक होता है। 
25 से 30 प्रतिशत कम हुए मेहमान पक्षी
खटीमा। वन्य जीव विशेषज्ञ जय प्रताप सिंह ने बताया कि दो दशक पहले से तुलना की जाय तो मेहमान पक्षियों के आने की संख्या 25 से 30 प्रतिशत तक कम हो गई है। यह भी कहा कि पक्षियों के आने की संख्या में कमी का कारण प्रदेश के सूखते जलाशय, पानी में प्रदूषण, मौसम में बदलाव और भारी मात्रा में पक्षियों का होता शिकार है। 

पत्ते पर दाना डाल पक्षियों को बनाते हैं शिकार       
खटीमा। साईबेरियन पक्षियों का शिकार करने के लिए शिकारी एल्ट्रिन अथवा नुआन के घोल में धान भिगोने के बाद पत्तों पर रख सागर के पानी में पत्ते बहा देते हैं। यह पत्ते हवा से सागर में तैरते रहते हैं जिन्हें चारा समझ पक्षी इस पर रखे धान को खाते हैं और बेहोश हो जाते हैं जिन्हें शिकारी बाद में उठा लाते हैं। शिकारी यह चारा शाम के समय में सागर में छोड़ते हैं सुबह अंधेरे में सागर में जाकर बेहोश पड़े पक्षियों को उठा लाते हैं और बिक्री करते हैं।        

यह प्रजातियां आती हैं
खटीमा। वन्य जीव विशेषज्ञ जय प्रताप सिंह ने बताया कि उत्तराखंड क्षेत्र में आने वाले साइबेरियन पक्षियों में मुख्य रूप से रडी सेल-डक, पिंटेल-डक, कूड्स, रेड पोचार्ड, पेंटेंल स्टार्क, ग्रे हेडेड गल, नीली जलमुर्गी, जैकआना, रोजी टेलकम, अमूर फलकॉन, ब्लूथ्रॉट, ब्लैक विंग्ड स्टील्ट, ब्लू टेल्ड बी इस्टर, बार हेडेड ग्रूज, रोजी स्टरलिंग प्रजाति के पक्षी आते हैं।
         
सुरक्षा को तीन टीमें गठित : एसडीओ       
खटीमा। साइबेरियन पक्षियों की सुरक्षा के संबंध में पूछे जाने पर एसडीओ वन बाबूलाल ने बताया कि दो राज्यों की संयुक्त सीमा पर स्थित होने के चलते दोनों प्रदेशों की संयुक्त टीम गठित की गई है। जिसमें यूपी की महोफ और उत्तराखंड की सुरई रेंज के अधिकारी शामिल हैं जिन्होंने गश्त शुरू भी कर दी है। उन्होंने कहा कि डिप्टी रेंजरों के नेतृत्व में गठित प्रत्येक टीम में 10-10 सदस्य हैं। यह भी बताया कि यूपी की टीम के पास स्टीमर भी है जिससे सागर में निगहबानी की जाती है।  
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