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हथियारी और खैरा नदी को बचाने की हो रही कसरत 

अमर उजाला ब्यूरो  Updated Wed, 17 Apr 2019 12:05 AM IST
हत्यारी नदी के किनारे लगा कूड़े का ढेर।
हत्यारी नदी के किनारे लगा कूड़े का ढेर। - फोटो : amar ujala
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टांडा जंगल से निकलकर हजारों एकड़ जमीन को सींचने वाली हथियारी और खैरा नदियों को प्रदूषण मुक्त करने की कवायद की जा रही है। स्वजल विभाग और अशोका लीलेंड कंपनी साझा मुहिम चलाकर नदियों को साफ करने के साथ ही डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन सहित तमाम इंतजाम करेंगी। नालियों का पानी नदी में न मिले, इसके लिए पहले चरण में स्वजल की ओर से छतरपुर गांव में नालियां बनाने का काम किया जा रहा है। छतरपुर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए अशोका लीलेंड की ओर से खरीदे गए वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 
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दरअसल सरकार ने देहरादून की रिस्पना सहित तमाम नदियों के पुनर्जीवन को लेकर प्रयास शुरू किए थे। स्वजल के परियोजना निदेशक ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के साथ नदी पुनर्जीवन अभियान को जोड़ते हुए हथियारी और खैरा नदियों को प्रदूषणमुक्त करने का खाका तैयार किया था।  इस योजना को अशोक लीलेंड का सहयोग मिला है।

दरअसल टांडा जंगल से निकलने वाली दोनों नदियां आबादी में पहुंचते ही कचरे से पट जाती हैं। प्रदूषण के चलते नदी का जलस्तर भी लगातार कम हो रहा है। वहीं कई जगहों पर दोनों नदियां काफी संकरी भी हो गई हैं। खैरा नदी टांडा जंगल से जयनगर तो हथियारी नदी छतरपुर, भगवानपुर, बिंदुखेड़ा, दानपुर सहित कई गांवों में सिंचाई के लिए पानी देती है। अब स्वजल और अशोका लीलेंड ने दोनों नदियों को प्रदूषणमुक्त करने की अभिनव पहल शुरू की है। 

कोट 
हथियारी और खैरा नदियों को पुराने स्वरूप में लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्वजल से छतरपुर के लिए 29 लाख का बजट मिला है और अशोका लीलेंड ने 35 लाख रुपये दिए हैं। स्वजल की ओर से छतरपुर में नालियां बनाई जा रही हैं ताकि गंदा पानी सीधे नदी में न जाए। नालियां बनाने के बाद संयंत्र लगाया जाएगा, उसमें नालियों का पानी ट्रीटमेंट के बाद नदी में छोड़ा जाएगा। सेग्रीकेशन सेंटर, घर-घर में डस्टबिन के साथ ही डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाएगा। जयनगर से गुजरने वाली खैरा नदी को साफ सुथरा बनाने के लिए भी यही सारे कार्य होंगे। मंगलवार को संयुक्त रूप से खरीदे गए कूड़ा कलेक्शन वाहन को छतरपुर में रवाना किया गया। - हिमांशु जोशी, परियोजना निदेशक, स्वजल। 
इनसेट 
गांवों के सिंचाई का प्रमुख जरिया हैं नदियां : परिहार 
रुद्रपुर। वन विकास निगम के अध्यक्ष और छतरपुर निवासी सुरेश परिहार ने बताया कि वर्षों पहले हथियारी नदी का बहाव इतना तेज होता था कि इसमें जानवर तक बह जाया करते थे। नदी के किनारे बड़ी संख्या में बेंत होती थी। बेंत के टेंडर होते थे और ठेकेदार इसी दौरान नदी की सफाई भी कर देते थे लेकिन नदी काफी प्रदूषित हो चुकी है और बेंत भी लुप्त हो गई है। दोनों नदियां गांवों में सिंचाई का महत्वपूर्ण जरिया है। इसलिए नदियों के बीच-बीच में छोटे-छोटे डैम बने हैं। प्रदूषण से नदियों का जलस्तर काफी कम हो चुका है और इनका पुनर्जीवन जरूरी है। 

 

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