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प्लेसमेंट न मिलने की हताशा में शिवांश ने उठाया था आत्मघाती कदम

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 11:28 PM IST
डॉ. कमला धौलाखंडी भारद्वाज, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान, रुद्रपुर डिग्री कॉलेज।
डॉ. कमला धौलाखंडी भारद्वाज, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान, रुद्रपुर डिग्री कॉलेज। - फोटो : RUDRAPUR
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पंतनगर। जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में बीटेक के छात्र शिवांश चौहान ने कंपनी में प्लेसमेंट न होने की हताशा में आत्मघाती कदम उठाया था। विश्वेसरैया भवन के छात्रावास से बृहस्पतिवार सुबह पुलिस टीम को उसका सुसाइड नोट मिला जिसमें उसने प्लेसमेंट न मिलने पर निराश होने की बात लिखी है।

नरायवाला, धामपुर, बिजनौर (यूपी) निवासी शिवांश (21) पुत्र वीरेंद्र चौहान बीटेक चतुर्थ वर्ष का छात्र था। बुधवार दोपहर वह प्लेसमेंट की लिखित परीक्षा देकर छात्रावास लौटा और अपने कमरे में चला गया। शाम साढ़े चार बजे उसके कैफेटेरिया नहीं पहुंचने पर साथी 33 नंबर कमरे में पहुंचे तो शिवांश का शव पंखे से लटकता मिला।

बृहस्पतिवार सुबह पुलिस टीम के साथ शिवांश के परिजन भी छात्रावास पहुंचे। कमरे की तलाशी लेने पर पुलिस को नोटपैड में लिखा सुसाइड नोट मिला। परिजनों ने बताया कि शिवांश को पेट संबंधी गंभीर बीमारी थी। उसका उपचार हल्द्वानी और काशीपुर में चल रहा था। पुलिस ने उसके कमरे से चार अलग-अलग दवाइयों के लगभग एक दर्जन पैकेट भी बरामद किए है। पुलिस कमरे से बरामद सूती चादर, नोट पैड, मोबाइल और दवाइयों को सील कर दिया है। बृहस्पतिवार दोपहर लगभग एक बजे पोस्टमार्टम के बाद परिजन छात्र का शव लेकर अपने घर रवाना हो गए।
18 लाख रुपये सालाना पैकेज पर होना है छात्रों का चयन
पंतनगर। कॉलेज ऑफ एग्री बिजनेस मैनेजमेंट के कार्यवाहक निदेशक डॉ. आरएस जादौन ने बताया कि बुधवार को विश्वविद्यालय में एक कंपनी कैंपस प्लेसमेंट के लिए आई थी। कंपनी को चार चरणों (प्रारंभिक लिखित परीक्षा, फाइनल लिखित परीक्षा व दो साक्षात्कार) को पार करने के बाद 18 लाख रुपये सालाना पैकेज पर छात्रों का चयन करना था। इसके लिए प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के शिवांश सहित 144 छात्रों ने आवेदन किया था।
प्रारंभिक लिखित परीक्षा में शिवांश सहित 88 छात्र शामिल हुए थे। जिसका परिणाम घोषित होने के बाद 39 छात्र फाइनल लिखित परीक्षा के योग्य पाए गए। शिवांश का नाम नहीं था। इस कारण वह हताश हो गया और वहां से छात्रावास चला गया।
परीक्षा को अवसर समझें, अंतिम लक्ष्य नहीं
रुद्रपुर। सरदार भगत सिंह डिग्री कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कमला धौलाखंडी भारद्वाज का कहना है कि वर्तमान दौर प्रतिस्पर्धा का है। छात्र-छात्राओं को इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा से बचने की जरूरत है। किसी भी परीक्षा को वह एक अवसर की तरह समझें न कि अंतिम लक्ष्य की भांति। डॉ. धौलाखंडी कहती हैं कि कॅरिअर बनाने के लिए युवाओं को कई परीक्षाएं देनी पड़ती हैं, यदि एक परीक्षा में असफलता मिलती है तो उसके अनुभवों से सीख लेते हुए नए जोश व उत्साह के साथ नई परीक्षा की तैयारी में जुट जाना चाहिए। परीक्षा में असफल होने से या असफलता के डर से अपना जीवन खत्म करने जैसा आत्मघाती कदम उठाना किसी भी समस्या का हल नहीं है।
उन्होंने कहा कि जीवन में हार और जीत लगी रहती है, किसी भी हार अथवा असफलता से घबराने के बजाय उसका हिम्मत के साथ सामना करने की जरूरत है। किसी भी विपरीत परिस्थिति में अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखें। डॉ. धौलाखंडी ने कहा कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर कॅरिअर से संबंधित अधिक दबाव नहीं बनाना चाहिए। इससे युवा काफी दबाव महसूस करते हैं। ऐसे में अभिभावकों को भी अपनी भूमिका व जिम्मेदारी का समझना चाहिए। कभी-कभी छोटी गलतियों के बड़े नुकसान हो सकते हैं।
साझा करें दिक्कतें
आत्महत्या का विचार प्राकृतिक नहीं होता। मस्तिष्क में बायो न्यूरोलॉजिकल बदलाव के चलते आत्महत्या करने का विचार आता है। ऐसे ज्यादातर मामले मानसिक विकार के चलते होते हैं। लोगों को अपनी दिक्कतों को करीबियों से साझा करना चाहिए।
- डॉ. ईश्वर अग्रवाल, एमडी, पैगिया अस्पताल।
प्रतिस्पर्धा और कॅरिअर की चिंता बन रही है जानलेवा
काशीपुर। छात्र-छात्राएं भावावेश में जान देने जैसे कठोर कदम उठा रहे हैं। ऊधमसिंह नगर में पिछले पांच वर्षों में 67 छात्र-छात्राएं दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। इनमें से आईआईएम, कृषि विवि, पॉलिटेक्निक और उच्च प्रबंधकीय एवं तकनीकी संस्थानों में शिक्षा लेने वाले छात्र तक शामिल है।
-18 नवंबर, 2017: काशीपुर के आईएमएम में अध्ययनरत 22 वर्षीय कच्छ (गुजरात) निवासी यश बसंती भाई ठक्कर ने अपने छात्रावास के कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली थी। सुसाइड नोट में उसने लिखा था कि वह अब पढ़ाई का दबाव नहीं झेल पा रहा था और शिक्षा के सिस्टम से परेशान था।
-21 नवंबर, 2017: उत्तरकाशी के बड़कोट के पौंटी गांव निवासी 19 वर्षीय ज्योति लोही पंतनगर विवि में बीएससी कृषि द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। उसने विश्वविद्यालय के सुभाष छात्रावास में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह जिंदगी से निराश है।
-09 दिसंबर, 2017 : स्कूल से बीच में ही लौट आए जसपुर खुर्द निवासी करन (17) ने आत्महत्या कर ली। वह पढ़ाई के दबाव को लेकर डिप्रेशन में था।
-30 अप्रैल, 2017 : काशीपुर के वैशाली कालोनी निवासी कुलदीप शर्मा ने फांसी पर लटककर जान दे दी। वह द्वाराहाट से बीटेक कर रहा था।
-21 नवंबर, 2021: शिवालिक कॉलोनी कुंडेश्वरी निवासी अमित भट्ट बीकॉम अंतिम वर्ष का छात्र था। उसने फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली।
-06 सितंबर, 2021: सैनिक कॉलोनी निवासी दिनेश सिंह रावत ने आत्महत्या की थी। वह पढ़ाई के दबाव को लेकर परेशान था।
-26 अक्तूबर, 2021 : रुद्रपुर की वसुंधरा कॉलोनी निवासी बीटेक के छात्र अंकित ने पंखे से लटककर जान दे दी।
-05 नवंबर, 2017 : रुद्रपुर के रमपुरा निवासी सातवीं की छात्रा रिंकी ने आत्महत्या कर ली।
-19 जनवरी 2019 : ट्रांजिट कैंप निवासी चौथी के छात्र कमलेश ने फांसी लगा ली।
-21 अगस्त, 2016: सितारगंज की मनीषा ने अपनी परेशानी से तंग आकर जान दे दी। संवाद

मृतक शिवांश का सुसाइड नोट,मोबाइल व दवाइयां सील करती पुलिस।

मृतक शिवांश का सुसाइड नोट,मोबाइल व दवाइयां सील करती पुलिस।- फोटो : RUDRAPUR

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