गरीबों के घरों में नहीं गल रही सरकार द्वारा दी जा रही दाल

Haldwani Bureauहल्द्वानी ब्यूरो Updated Fri, 23 Oct 2020 12:52 AM IST
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लीलावती।
लीलावती। - फोटो : RUDRAPUR

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गरीबों के घरों में नहीं गल रही सरकार की दी हुई दाल
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जिला पूर्ति कार्यालय में दालों की खामियों को लेकर शिकायत कर रहे कार्डधारक
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। राज्य सरकार की ओर से सरकारी सस्ता गल्ला की दुकानों पर बांटी जा रहीं दालों में खामियों की शिकायतें मिल रही हैं। जिला पूर्ति कार्यालय में कार्ड धारक दाल नहीं गलने और उनकी गुणवत्ता सही नहीं होने की शिकायत कर रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी ने इस शिकायत से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है।
सरकार की ओर से एपीएल, बीपीएल व अंत्योदय कार्ड धारकों को प्रत्येक माह 50 रुपये किलो के हिसाब से दो किलो दाल दी जा रही है। शुरुआत में दो किलो दली हुई चने की दाल बांटी गई थी लेकिन बाद में साबूत मसूर की दालें दी गईं। कोरोना काल में सरकार ने सभी कार्ड धारकों को मुफ्त में भी दालें बांटीं। जिले में चार लाख से अधिक कार्ड धारकों ने सरकार की दाल का स्वाद चखा। जिला पूर्ति कार्यालय में अब दाल में कमियां होने की शिकायतें पहुंचने लगी हैं। राशनकार्ड धारकों का आरोप है कि चने की दाल उच्च गुणवत्ता की नहीं बांटी जा रही है तो मसूर की साबूत दाल जल्द नहीं गल पा रही है। उन्होंने कुछ कोटेदारों पर भी दालों की सप्लाई करने में हेरफेर का आरोप लगाया है। डीएसओ श्याम आर्या ने बताया कि सरकार से मिलने वाली दालों को सीधे सस्ता-गल्ला विक्रेताओं के माध्यम से कार्ड धारकों को बांटा जा रहा है। दालों में किसी प्रकार की कोई कमियां नहीं हैं। कार्ड धारक दाल के नहीं गलने व गुणवत्ता सही नहीं होने की शिकायतें कर रहे हैं। इस बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है।
- सस्ता-गल्ला की दुकानों में मिलने वाली दाल की गुणवत्ता सही नहीं है। इसकी शिकायत मैं राशन विक्रेता के साथ ही जिला पूर्ति कार्यालय में कर चुकी हूं। कुकर में कई सीटी लगाने के बाद भी दाल नहीं गल रही है। वे लोग कैसे बनाते होंगे जिनके पास कुकर नहीं हैं। शकीला बेगम, जगतपुरा
- दाल बांटने के नाम पर राशन विक्रेता मनमानी कर रहे हैं। पिछले तीन माह से मुझे एक भी बार दाल नहीं मिली। इससे पहले जो दाल मिली वह बहुत खराब थी। इसकी शिकायत जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में दर्ज कराई है। नरेश पाल, रंपुरा
- राशन विक्रेता लंबे समय से दाल नहीं लाने की बात कहते हैं। कुछ लोगों को दाल बांटी जाती है। चार माह पहले दो किलो चने की दाल मिली थी जिसमें कीड़े निकले थे और गुणवत्ता काफी खराब थी। समीम खान, खेड़ा।
- सरकार की ओर से मिल रही दाल को बांटने में खानापूर्ति की जा रही है। मनमाने तरीके से दालों को बांटा जाता है। मसूर की दाल आधी पक जाती है तो आधी कच्ची रहती है। लीलावती, ट्रांजिट कैंप
फोटो- 22आरडीपी09पी- शकीला बेगम।
फोटो- 22आरडीपी10पी- नरेश पाल।
फोटो- 22आरडीपी11पी- समीम खान।
फोटो- 22आरडीपी12पी- लीलावती।
शमीम खान।
शमीम खान।- फोटो : RUDRAPUR
नरेश पाल।
नरेश पाल।- फोटो : RUDRAPUR
शकीला बेगम।
शकीला बेगम।- फोटो : RUDRAPUR
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