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हथकरघा उद्योग ठप, 20 हजार बुनकरों के सामने आर्थिक संकट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jul 2020 12:48 AM IST
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जलालउद्दीन।
जलालउद्दीन। - फोटो : KASHIPUR
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लॉकडाउन के चलते हथकरघा उद्योग पूरी तरह से ठप हो गया है। काशीपुर क्षेत्र में करीब 50 हथकरघा सहकारी समितियों के लगभग 20 हजार बुनकरों के सामने आर्थिक संकट आने से भुखमरी की नौबत आ गई है।
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एक वक्त ऐसा था जब काशीपुर की हथकरघा पर बनी जनता धोती पूरे उत्तर प्रदेश में सप्लाई होती थी। यहां तक की धोती नेपाल तक जाती थी। यहां बुनकरों की लगभग 50 सहकारी समिति थीं। एक समिति में 25 से 100 आदमी काम करते थे। लॉकडाउन के चलते हथकरघा का कारोबार ठप हो गया है। समितियों के पास जो कच्चा माल था उसका उन्होंने कपड़ा बना दिया है।

बाजार में बिक्री नहीं होने से तैयार माल डंप पड़ा है, खरीदार नहीं हैं। बुनकर के साथ उसका पूरा परिवार काम करता है। बुनाई का काम बंद होने से पूरा परिवार घर में खाली बैठा हुआ है। खाने तक के लाले पड़ गए हैं। केंद्र सरकार बुनकरों के लिए कई योजनाओं की घोषणा कर चुकी है लेकिन योजनाएं घोषणा तक सीमित हो कर रह गई हैं। धरातल पर कोई योजना नहीं चली।
लॉकडाउन के चलते हथकरघा बुनकर सहकारी समितियों के पास कोई काम नहीं है। समितियों के पास जो कच्चा माल पड़ा था बुनकरों ने उसी का कपड़ा तैयार कर दिया लेकिन बाजार में डिमांड नहीं है। बुनकरों की मदद के लिए सरकार की कोई योजना नहीं आई है। समितियों के बुनकर सदस्य घरों में खाली बैठे हैं। उनके साथ ही उनका परिवार भी बेरोजगार हो गया है।
-इसरार, अध्यक्ष रानी हरकरघा को-ऑपरेटिव सोसायटी, गुलड़िया।
बुनकरों के पास जो कच्चा माल था, उसका कपड़ा बना लिया। हथकरघा उत्पाद का साप्ताहिक बाजार ठाकुरद्वारा (यूपी) में लगता है। राज्य सीमा बंदी के कारण बुनकर माल लेकर ठाकुरद्वारा नहीं जा पा रहे हैं जिससे उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है। परिवार भुखमरी के कगार पर हैं।
-जलाल उद्दीन, अध्यक्ष हीना बुनकर सहकारी समिति, महुआडाबरा।
सरकार की खाद्य योजना से घरों में बेरोजगार बैठे बुनकरों को काफी राहत मिली है अन्यथा परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए थे। ठाकुरद्वारा हाट बाजार नहीं जा सकने के कारण जो कपड़ा तैयार रखा हुआ है वह भी नहीं बिक रहा है। इससे बुनकर गंभीर संकट में हैं।
-मोहम्मद याकूब, अध्यक्ष कादरी हथकरघा सहकारी समिति बाबरखेड़ा।
तैयार माल बिक नहीं रहा है और नया बनाने के लिए कच्चा माल खरीदने को रुपये नहीं है। बुनकर और उनके परिवार खाली बैठे हुए हैं। उनके सामने परिवार पालने का संकट उत्पन्न हो गया है।
-शमशेर, हथकरघा बुनकर
लॉकडाउन के चलते बुनकरों की आर्थिक स्थिति खराब है। डिमांड नहीं होने से कपड़ा बुनाई का काम ठप है। बुनकर हाथ पर हाथ धरे घरों में बेरोजगार बैठे हैं।
-फतेहबहादुर सिंह, पूर्व डिप्टी डायरेक्टर, उद्योग विभाग।
बुनकरों की हालत ठीक नहीं है। उनके पास जो कच्चा माल था उसका उन्होंने कपड़ा बना दिया। कपड़ा बिक नहीं रहा है जिससे कच्चा माल खरीदने को उनके पास रुपया नहीं है। इससे काम ठप हो गया है।
-कुमकुम पोखरिया, प्रभारी, डिजायन सेंटर।
शमशेर।
शमशेर।- फोटो : KASHIPUR
मोहम्मद याकूब।
मोहम्मद याकूब।- फोटो : KASHIPUR

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