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रेडियोलॉजी परीक्षण में पीड़िता के व्यस्क होने की पुष्टि

Udham singh nagar Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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काशीपुर। गैंगरेप पीड़िता के व्यस्क होने की पुष्टि पर न्यायिक दंडाधिकारी ने उसे अपनी मर्जी से कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र करार कर दिया। हालांकि, अपने निर्णय में मजिस्ट्रेट ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से वह पुन: नारी निकेतन भी जा सकती है। साथ ही पुलिस को मामला अत्यधिक गंभीर प्रवृति का होने तथा पीड़िता के महत्वपूर्ण साक्षी होने के चलते उसकी समुचित सुरक्षा करने का आदेश दिया।
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शनिवार को विवेचक सीओ देवेंद्र पिंचा ने न्यायिक दंडाधिकारी मुकेश चंद्र आर्य की अदालत में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया कि अदालत ने पीड़िता की आयु की स्पष्ट जानकारी के लिए उसका रेडियोलॉजी परीक्षण करा रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। इधर, आज पीड़िता को नारी निकेतन हल्द्वानी भेजने से पहले पुलिस ने तीन चिकित्सकों के पैनल से उसका रेडियोलॉजी परीक्षण कराया, जिसमें उसकी उम्र 18 वर्ष से अधिक होना पाया गया।

अदालत ने पीड़िता के कथन सुन और उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन कर कहा कि विधि अनुसार 18 वर्ष का कोई भी स्त्री या पुरुष व्यस्क माने जाते हैं। व्यस्क होने के कारण वह अपने भले-बुरे के बारे में स्वयं निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। लिहाजा, पीड़िता अपनी मर्जी से कहीं भी आने-जाने के लिए स्वतंत्र है।

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