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साहित्यकारों की भूमिका, दशा और दिशा पर चर्चा

Udham singh nagar Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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खटीमा। तृतीय इंडो-नेपाल महिला बाल साहित्यकार सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में महिला एवं बाल साहित्य के परिप्रेक्ष्य में साहित्यकारों की भूमिका, दशा और दिशा पर चर्चा की गई। नन्हीं बालिका सिमरन गोयल और ताक्षी अधिकारी की कविताओं ने श्रोताओं में समा बांधा।
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स. मान सिंह दत्ता स्मृति की स्मृति में बाल कल्याण, बाल साहित्य शोध संस्थान न्यास एवं नोजगे पब्लिक स्कूल के तत्वावधान में नोजगे पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित समारोह का शुभारंभ करते हुए विधायक पुष्कर सिंह धामी ने कहा समाज को सही दिशा देने में जहां महिलाएं अहम भूमिका अदा कर सकती हैं, वहीं बाल साहित्य भी विशेष स्थान रखता है। हल्द्वानी कालेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डा. प्रभा पंत ने कहा महिला-पुरुष के बीच असमानता हमने पैदा की है न कि प्रकृति ने। बरेली की डा. महाश्ेवता चतुर्वेदी ने कहा कि साहित्य ऐसा होना चाहिए जो महिलाओं की समस्या को उजागर कर सके, क्योंकि मां ही बच्चों की भावनाओं को समझ पाती है। राष्ट्रीय साहित्य एकेडमी नेपाल के सदस्य डा. महादेव अवस्थी ने कहा भारत और नेपाल की न केवल संस्कृति समान है, बल्कि उनमें रोजी के साथ ही रोटी और बेटी के भी संबंध हैं, जिसका उदाहरण नेपाली भाषा को भारत में स्वीकार किया जाना है।

बाल साहित्य और महिलाओं की भूमिकाओं पर हुई परिचर्चा में पूर्व प्राचार्य हुबली कर्नाटक की डा. जुबेदा हाशिम मुल्ला, डा. सुनीति रावत हरियाणा, सुरिंदरजीत कौर पंजाब, आशा कुलश्रेष्ठ राजस्थान, डा. पुष्पापाल दिल्ली, नार्दन रेलवे लखनऊ की लेखाधिकारी स्नेहलता, डा. बानो सरताज चंदपुर, नेपाली प्रतिनिधि मीना पंत, नारा जोशी, चंद्रकला पंत, निर्मला भाट, पुष्पा जोशी ने बाल साहित्य एवं भारत-नेपाल के संबंधों की प्रगाढ़ता पर चर्चा की। संचालन रवि वर्मा, जबकि प्रबंध निदेशक सुरेंद्र कौर ने अतिथियों का आभार जताया। अध्यक्षता पूर्व विभागाध्यक्ष हिंदी दुबई जम्मू कश्मीर की डा. बीना बुदकी ने किया।
इस दौरान ईस्टर कारखाना प्रबंधक एके सिंह, साहित्यकार शिक्षाविद डा. चमनलाल सप्रू जम्मू कश्मीर, लीना मेंहदले, वरुण अग्रवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष अरुण सक्सेना, राज सक्सेना, भगवान मिश्रा, डीसी तिवारी, नेपाली प्रतिनिधि वीर बहादुर चंद, अध्यक्ष महाकाली साहित्य संगम, इतिहासकार राजेंद्र रावल, हरीश प्रसाद जोशी आदि मौजूद थे।

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