बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

खतरे में फसलों की सुरक्षा करने वाले मित्र कीट

Udham singh nagar Updated Sat, 09 Feb 2013 05:31 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
काशीपुर। फसलों के रक्षक मित्र कीट लगातार रसायनिक कीटनाशकों एवं दवाइयों के अत्यधिक प्रयोग से मर रहे हैं, इससे फसलों को शत्रु कीट भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिस कारण फसलों का उत्पादन लगातार गिर रहा है।
विज्ञापन

प्रकृति ने फसलों की सुरक्षा को प्राकृतिक व्यवस्था की है। वातावरण में दो प्रकार के कीट मित्र कीट और शत्रु कीट पनपते हैं। किसान द्वारा बोई गई फसल को चौपट करने के लिए शत्रु कीट हमेशा प्रयास में लगा रहता है, परंतु मित्र कीट फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले शत्रु कीटों को अपना निवाला बनाते हैं, लेकिन किसानों ने स्वयं अपने मित्र कीटों को मारने का काम भी शुरू कर दिया है। किसान फसलों की सुरक्षा के लिए रसायनिक दवाओं का भारी उपयोग करते हैं। इन दवाओं से शत्रु कीट तो मर ही रहे हैं साथ ही मित्र कीट भी खत्म हो रहे हैं।

मित्र कीटों के मरते ही नए सिरे से शत्रु कीट पनपने लगते हैं और फसलों को चौपट कर देते हैं। इससे किसान को भारी नुकसान हो रहा है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है किसान अत्यधिक फसल उत्पादन के लिए रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करता है तो वह पहले उनसे सलाह ले। इससे उत्पादन तो बढ़ेगा साथ ही मित्र कीटों की सुरक्षा भी हो सकेगी।

मित्र कीट कल्चर का करें छिड़काव : डा. शर्मा
काशीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा.अशोक कुमार शर्मा ने बताया किसानों के फसलों में दवाओं की अनुमोदित मात्रा से अधिक छिड़काव से शत्रु कीट के साथ-साथ मित्र कीट भी मर जाते हैं। मित्र कीट शत्रु कीटों का भोजन करता है, जिससे फसलों की सुरक्षा होती है, परंतु जब मित्र कीट ही नहीं रहेगा तब शत्रु कीट तेजी से पनपकर फसल को नुकसान पहुंचाता है। डा.शर्मा ने बताया मित्र कीटों के घटने का कारण फसल चक्र का बढ़ना भी है। उन्होंने कहा पहले साल में दो फसलें ही होती थी, जिससे मित्र कीटों को बढ़ने का अवसर मिलता था, परंतु अब मैदानी भागों में किसान साल में तीन-तीन फसलें ले रहे हैं, जिससे मित्र कीटों को पनपने का समय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने किसानों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुमोदित दवाइयाें एवं मात्रा का ही प्रयोग करने की सलाह दी। कहा कि मित्र कीटों की संख्या बढ़ाने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय द्वारा उत्पादित मित्र कीट कल्चर को कीट विभाग से प्राप्त कर खेतों में छिड़काव करना चाहिए। किसानों को इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर से समय-समय पर जानकारी दी जाती है। इसके अलावा किसान केंद्र में आकर इस संबंध में सीधे पूछताछ भी कर सकते हैं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us