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गैंगरेप की पीड़िता को अदालत ने नारी निकेतन भेजा

Udham singh nagar Updated Sat, 09 Feb 2013 05:31 AM IST
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काशीपुर। पुलिस द्वारा गैंगरेप की पीड़िता की वास्तविक उम्र का प्रमाण प्रस्तुत नहीं करने पर न्यायिक मजिस्ट्रेट मुकेश चंद्र आर्य की अदालत ने पुलिस को 13 फरवरी तक मेडिकल बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने को कहा है। तब तक के लिए पीड़िता को नारी निकेतन भेजने का आदेश दिया।
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छह दिन पहले एक लड़की के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। लड़की द्वारा दर्ज रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार कर लिया। पीड़िता को सरकारी अस्पताल काशीपुर में भर्ती कराया गया। अगले दिन सुशीला तिवारी हॉस्पिटल हल्द्वानी में रिफर पीड़िता शुक्रवार को रिलीव हो गई। सीओ देवेंद्र पिंचा ने पीड़िता की सुपुर्दगी के संबंध में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया। पुलिस ने अदालत को बताया कि पीड़िता का पति उसे छोड़ चुका है। माता से कोई संबंध नहीं है। वहीं उसका कोई सगा-संबंधी भी नहीं है। पुलिस ने पीड़िता की उम्र के संबंध में परिवार की कापी प्रस्तुत की। जिसमें जन्मतिथि रजिस्टर में जन्मतिथि 1995 है। जबकि पहचान पत्र में उम्र 1 एक जनवरी को 19 वर्ष है। अदालत ने उम्र संबंधी अभिलेखों को देखने के बाद अपने निर्णय में कहा कि पुलिस ने पीड़िता की उम्र के संबंध में शैक्षिक प्रमाणपत्र व जन्म प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया है जो उसकी आयु की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करे।

अदालत ने कहा कि लड़की की वास्तविक उम्र स्पष्ट होने पर ही अदालत यह तय कर पाएगी कि उसे नारी निकेतन भेजा जाए या किसी की सुपुर्दगी के संबंध में कोई निर्णय लिया जा सके। तब तक के लिए पीड़िता को नियमानुसार मेडिकल कराकर नारी निकेतन हल्द्वानी भेजने का आदेश दिया।

पीड़िता के नहीं हुए थे मजिस्ट्रेटी बयान
काशीपुर। गैंगरेप की पीड़िता के संबंध में पुलिस ने गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाया। घटना के दिन 3 फरवरी से अब तक पुलिस ने पीड़िता का मजिस्ट्रेटी बयान दर्ज नहीं कराया। इसके साथ ही पुलिस ने पीड़िता की वास्तविक उम्र जानने के लिए जन्म प्रमाणपत्र नहीं बनवाया है। अगर यह बन गया होता तो अदालत यह निर्णय ले लेती कि पीड़िता को नारी निकेतन भेजा जाए या उसके किसी परिजन की सुपुर्द में दिया जाए या फिर स्वतंत्र छोड़ दिया जाए।

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