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उपेक्षा से आहत शहीद की पत्नी करेंगी अनशन

Udham singh nagar Updated Fri, 25 Jan 2013 05:32 AM IST
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खटीमा। सरकार की उपेक्षा से खफा शहीद देवेंद्र सिंह की पत्नी गीता ने 26 जनवरी गणतंत्र दिवस से तहसील परिसर में अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है। उसका आरोप है राज्य एवं केंद्र सरकार की ओर से शहीद के नाम पर स्मारक बनाने और उनके बच्चों की सही परवरिश का आश्वासन दिया गया था, जो कोरा साबित हुआ है। आज भी उसका परिवार तमाम परेशानियों के बीच किराए के भवन में रह रहा है। उसका कहना है जब उसके पति का पार्थिव शरीर सेना के जवान घर लेकर पहुंचे तो उन्हें शहीद के अंतिम दर्शन नहीं करने दिए। उसने पति का सिर विहीन शव भेजने की आशंका भी जताई है। वहीं, शहीद की पत्नी की घोषणा से स्थानीय प्रशासन के हाथपांव फूल गए हैं। प्रशासन उसे मनाने का प्रयास कर रहा है।

पिथौरागढ़ जनपद के डीडीहाट तहसील के ग्राम उड़मा निवासी होशियार सिंह खड़ायत का पुत्र देवेंद्र सात जनवरी 1990 में पिथौरागढ़ से 20 कुमाऊं में भर्ती हुआ था और लांस नायक रैंक लेकर जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात था। 30 जुलाई 2011 को सेक्टर गूगलधार के दुर्गम इलाके में आतंकियों से लोहा लेते हुए वह शहीद हो गया, जिसका पार्थिव शरीर छह अगस्त की सुबह सेना के जवानों द्वारा उसके पैतृक गांव पहुंचाया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जवान के शरीर पर एके 47 की गोलियां लगने और अत्यधिक रक्तस्राव से मौत होने का खुलासा हुआ था। शहीद की पत्नी ने बताया कि जवानों ने उसके पति के पार्थिव शरीर को परिजनों को नहीं देखने दिया और अंतिम संस्कार करा दिया।

इधर, बीते दिनों दो जवानों के सिर काटने की घटना के बाद अब उन्हें आशंका है कि देवेंद्र का भी सिर विहीन शव भेजा गया था। गीता का आरोप है जवान की शहादत के वक्त की गई घोषणाएं भी कोरी साबित हुई है। फंड एवं बीमे की राशि से बमुश्किल गुजर-बसर कर रही शहीद की पत्नी गीता ने 26 जनवरी से अनशन की घोषणा की है। उधर, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष कुंवर सिंह खनका ने शहीद की पत्नी की शिकायत को उचित बताते हुए उसके साथ अनशन पर बैठने की घोषणा की है।

परेशानियों से जूझ रहे शहीद के परिजन
खटीमा। दुश्मनों से लोहा लेते समय शहीद हुए देवेंद्र के आश्रित तमाम परेशानियों से जूझ रहे हैं। छह माह पूर्व अपने पैतृक गांव छोड़कर ग्राम अमाऊं में एक किराए के मकान में जीवन यापन कर रहे हैं। उन्होंने बमुश्किल मिली बीस लाख की राशि में से खटीमा में साढे़ सात लाख की लागत वाला 30 गुणा 70 फिट का एक प्लाट क्रय किया है। अधिक गहरा होने के कारण इसमें लगभग साढ़े तीन लाख रुपये से मिट्टी भरान कराया। मकान बनाने की रकम नींव में ही खर्च हो गई। शहीद के घर पर उसकी पत्नी के अलावा वृद्ध माता-पिता और नौ वर्षीय युवराज एवं ढाई वर्षीय नैतिक है, जो आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, जबकि शहीद की एक बहिन की पढ़ाई और उसकी शादी कराने की चिंता परिजनों को बनी हुई है।

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