नदियों-जंगलों में हो रहा अवैध खनन

Udham singh nagar Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
खटीमा। विकासखंड के जंगल, गांव एवं नदियां खनन माफियाओं की गिरफ्त में हैं। खनन माफियाओं पर पुलिस-प्रशासन का कोई अंकुश नहीं रह गया है। कृषि कार्य के लिए स्वीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन-रात खनन कार्य में जुटी हैं। माफिया सबसे अधिक कामन नदी एवं सेनापानी के जंगल में सक्रिय हैं। सूत्रों की मानें तो इन जंगलों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में पत्थर लाने वालों से प्रति ट्राली 800 रुपये वसूला जा रहा है, लेकिन यह पैसा किसकी जेब में जा रहा है यह जांच का विषय है, जबकि यह नदियां वन विभाग के अधीन हैं। खनन के चलते नदियों का रुख बदलने लगा है। भूकटाव से कई एकड़ कृषि भूमि नदी लील चुकी है।
दियां-गांगी, बिरिया मझोला गांव में माफिया बेखौफ खनन कर रहे हैं। कई गांवाें में छान लगाकर रेता, बजरी, आरबीएम अलग किया जा रहा है। सबौरा गांव में भी एक स्थान पर छान लगा है, जिसकी जांच के बाद पता चलेगा कि रेत एवं बजरी किस नदी से लाया गया है। ऐसा नहीं कि इसकी जानकारी हल्का पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी एवं ग्रामीण जनप्रतिनिधियों को न हो, लेकिन खनन माफियाओं की दबंगई एवं राजनैतिक रसूख के आगे सभी नतमस्तक हैं।
वहीं, उपजिलाधिकारी हेमंत वर्मा का कहना है खनन की सूचनाएं उन्हें मिल रही हैं, लेकिन जब वह मौके पर पहुंचे, तो वहां कोई नहीं मिला। अलबत्ता गांव में निचले स्थानों पर भरान होते देखा गया है। एसडीओ फारेस्ट राजेश श्रीवास्तव ने बताया खनन की जद वाली नदियां जौलासाल एवं रनसाली में आती हैं। उन्होंने कहा अपने स्तर से इसमें कार्रवाई करेंगे। इधर, डीएफओ पीके पात्रो ने कहा खनन का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वह स्वयं अपने स्तर से मामले की जांच कराएंगे।

विकास कार्यों में हो रहा रेत-बजरी का इस्तेमाल
खटीमा। अवैध खनन कर लाए गए रेता, बजरी व पत्थर का इस्तेमाल विकास खंड में चल रहे विकास कार्यों के लिए हो रहा है। कई स्थानों पर बनने वाली सीसी, चहारदीवारी में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। नजदीक में मिलने वाली खनन सामग्री टैक्स अदा न होने के कारण अन्य स्थानों से सस्ता मिलता है। वहीं, निर्माण कार्र्य की गुणवत्ता में भी इस सामग्री का कुप्रभाव पड़ता है।

प्रतिदिन लाखों के राजस्व की क्षति
खटीमा। अवैध खनन के चलते सरकार को लाखों रुपए के राजस्व की क्षति हो रही है। कृषि कार्य के लिए स्वीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉली प्रतिदिन दस चक्कर लगाते हैं। लगभग 45 ट्रॉलियां रोजाना जंगल एवं नदी से खनन करते हैं, इसके साथ ही मिट्टी एवं रेत के खनन के लिए लगभग 300 ट्रॉलियां चलती हैं, जिनके पास कामर्शियल लाइसेंस तक नहीं हैं। सरकार को राजस्व के रूप में दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आला अधिकारियों के नाम पर भी वसूली
खटीमा। जौलासाल, रनसाली वन क्षेत्र में बहने वाली कामन नदी में चल रहे व्यापक स्तर के खनन में खनन माफियाओं की बन आई है, जो खनन कार्य में लगे वाहनों से पुलिस, शासन, प्रशासन, पत्रकारों सहित आला अधिकारियों के नाम से भी वसूली कर रहे हैं।

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