ग्राम स्तर पर मजबूत करना होगा संगठन

Udham singh nagar Updated Mon, 26 Nov 2012 12:00 PM IST
खटीमा। अनुसूचित जाति एवं जनजाति संयुक्त मोर्चा की बैठक में दिसंबर में होने वाले ‘उत्तराखंड में दलित आदिवासियों के भू एवं वनाधिकार की स्थिति और चुनौतियों’ पर दो दिनी राज्य स्तरीय संगोष्ठी पर चर्चा हुई। इसके अलावा ग्रामीण स्तर पर कमेटियों के गठन में हो रही देरी पर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा जब तक ग्राम स्तर पर संगठन मजबूत नहीं होगा, दलित आदिवासियों के हित सुरक्षित नहीं रहेंगे।
थारु विकास भवन में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा उत्तराखंड बनने के बाद प्रदेश में दलित आदिवासियों के भू एवं वनाधिकार सुरक्षित नहीं रह गए हैं। इन वर्गों की जमीनों पर लगातार कब्जे हो रहे हैं। आरोप लगाया भूमाफिया धन-बल, बाहुबल और राजनैतिक रसूक का लाभ उठाकर दलित-आदिवासियों की जमीनों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। वनाधिकारों पर वन विभाग के अधिकारियों ने कब्जा जमाया हुआ है।
इस दौरान प्रदेश में दलित-आदिवासियों के भू एवं वनाधिकार की स्थिति पर राज्य स्तरीय संगोष्ठी दिसंबर माह में कराने का निर्णय लिया गया, जिसमें भारत के विभिन्न प्रांतों से दलित आदिवासी वर्ग के बुद्धिजीवी, जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी भाग लेंगे। स्थानीय स्तर पर प्रत्येक गांव से युवा एवं जागरूक नागरिक संगोष्ठी का हिस्सा होंगे। संगोष्ठी की तैयारियों के लिए अगली बैठक दो दिसंबर को थारु विकास भवन में होगी, जिसमें कार्यक्रम की तिथि एवं कार्यकारिणी तय की जाएगी। इस दौरान एसके सेन, दान सिंह राणा, शीशराम राणा, रामायण प्रसाद, आरसी दास, पूनम राणा, बीएल गौतम, कन्हैया लाल आदि थे।

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