फर्जीबाड़े को रोकेगा जीपीएस सिस्टम

Udham singh nagar Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। अब फर्जी तरीके से एक ही निर्माण कार्य या क्रियान्वयन स्थल को बार-बार दिखाना आसान नहीं होगा। जीपीएस सिस्टम इस तरह के फर्जीपने पर रोक लगाएगा। मानीटरिंग के दौरान जीपीएस सिस्टम आसानी से बता देगा कि फलां कार्य स्थान विशेष पर पहले ही कराया जा चुका है और वहां पर उसे दोबारा कराने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार की समेकित जलागम प्रबंधन योजना (आईडब्ल्यूएमपी) के तहत इसकी शुरुआत की जा रही है। संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को सिस्टम को आपरेट करने की जानकारी भी दी जा चुकी है। दरअसल ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम (जीपीएस) उपग्रह प्रणाली पर आधारित है। पूर्व में इस पद्धति का उपयोग सिर्फ सैन्य सुविधाओं के लिए ही किया जाता था। लेकिन अब इसे सरकारी योजनाओं/ कार्यों में पारदर्शिता लाने के लिए भी किया जाएगा। सर्वविदित है कि पृथ्वी के हर स्थान का अलग-अलग अक्षांश व देशांतर होता है। जीपीएस सिस्टम इसी को मानक बनाकर काम करता है। मसलन यदि किसी जिले के किसी गांव विशेष में कोई तालाब बनाना है तो एक मोबाइल सरीखे उपकरण (जीपीएस) से उस स्थान की पोजीशन यानी की देशांतर व अक्षांश नोट किया जाएगा। और इसे जीआईएस में अपडेट कर दिया जाएगा। जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफोरमेशन सिस्टम) एक प्रोग्राम है, जो कि अलग-अलग साफ्टवेयर से संचालित किया जाता है। इस तरह जीआईएस की सहायता से संभावित निर्माण स्थल का देशांतर व अक्षांश देश के नक्शे में भी फीड हो जाएगा। गौरतलब है कि सर्वे आफ इंडिया द्वारा देश की स्थिति (नक्शा) के लिए टोपोशीट तैयार की है। इसमें हरेक स्थान के गांव शहर के कस्बे, महानगर के साथ ही नदी, नाले, पहाड़ का खाका जीआईएस के सहारे (अक्षांश व देशांतर) देखा जा सकता है। इस तरह नए निर्माण के पूरा होने के बाद उस स्थान व निर्माण कार्य की स्थिति इस खाके में डाल दी जाती है। इसका लाभ यह है कि सरकारी विभाग एक ही कार्य को बार-बार कराने का प्रयास नहीं करा पाएंगे। क्योंकि मानीटरिंग के दौरान उस स्थान के देशांतर व अक्षांश के आंकड़े दर्ज करने पर जीआईएस बता देगा कि वहां पर पहले से ही सड़क या अन्य निर्माण हो चुका है और निर्माण कराने की जरूरत नहीं है। दूसरा लाभ यह है कि कार्य की जांच के लिए संबंधित स्थल पर जाने में भी अधिकारियों को समय नहीं गंवाना पडे़गा। प्रोग्राम आपरेट करते ही असली तस्वीर दिखाई पड़ेगी। प्रशिक्षण प्रबंधक उमेश पांडे ने बताया कि जीपीएस बैट्री से संचालित होने वाला व सैटेलाइट पद्धति पर कार्य करने वाला एक छोटा सा यंत्र है। यह ऑन करने पर स्वत: ही स्थान विशेष के देशांतर व अक्षांश के आंकड़े दर्ज कर लेता है।

पता बताने में भी कारगर जीपीएस तकनीक
रुद्रपुर। जीपीएस तकनीक पारदर्शिता के लिहाज से तो कारगर है ही साथ ही इसके उपयोग से गंतव्य का भी पता लगाया जा सकता है। मसलन यदि हमें किसी स्थान की जानकारी नहीं और उस स्थान के देशांतर व अक्षांश मालूम है तो जीपीएस के सहारे उस स्थान का भी पता लगाया जा सकता है।

- जीपीएस से रीडिंग लेने के बाद संबंधित कार्य की मानीटरिंग कहीं भी बैठे तो की ही जा सकती है। साथ ही निर्माण स्थल को कहीं से कहीं दिखाने की घटनाओं में रोक लग जाएगी। इससे कार्य को फर्जी तरीके से दोबारा कराने तक की नौबत ही नहीं आएगी।
- डॉ धीरेंद्र शाह, असिस्टेंट निदेशक, उत्तराखंड ग्राम्य विकास संस्थान, ऊधमसिंहनगर।

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