सूर्या रोशनी की राह पर काशीपुर शुगर मिल

Udham singh nagar Updated Wed, 24 Oct 2012 12:00 PM IST
काशीपुर। अभी सूर्या रोशनी के एकाएक बंद होने से श्रमिकों के घाव भरे भी नहीं थे कि अब काशीपुर शुगर मिल में तालाबंदी का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में एक बार फिर श्रमिक असंतोष उपज सकता है।
काशीपुर शुगर मिल को मालिक चलाना नहीं चाहते हैं। पिछला पेराई सत्र खत्म होने के बाद भी मिल की फिटनेस अब तक शुरू नहीं की गई। प्रबंधकों की मंशा को लेबर यूनियन के नेता भांप नहीं पाए, जबकि मिल ने क्लोजर का प्रार्थना पत्र शासन में लगा दिया था, बावजूद इसके यूनियनों में कोई हलचल नहीं हुई। सिवाय नेताओं को ज्ञापन देने और धरना देने के अलावा कोई ठोस काम नहीं हुआ, यानी मजदूर बंदी की आशंका को भांप गए, परंतु तीखे तेवर नहीं दिखा पाए। पिछले सीजन में मिल 30 नवंबर को चली और 31 मार्च को बंद हुई। मिल ने 25.44 लाख कुंतल गन्ना की पेराई कर 2 लाख 21 हजार 90 कुंतल चीनी का उत्पादन किया। मिल प्रबंधकों ने तो चीनी मिलों की सुरक्षण बैठक में ही भाग नहीं लिया। यहां तक कि गन्ना विभाग को अब तक गन्ना की डिमांड नहीं भेजी गई है। किसानों के बकाया लगभग 27 करोड़ रुपये के भुगतान की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जबकि आरसी कट चुकी है। यानी मिल प्रबंधकों ने एक साथ श्रमिक, किसान और सरकार से भिड़ने का इरादा बना लिया है, फिर भी किसान नेता तथा राजनैतिक दलों के लोग मजदूरों को मिल चलाने का आश्वासन किस आधार पर दे रहे हैं यह समझ से परे है।

आस लगाए बैठे हैं किसान और मजदूर नेता
काशीपुर। भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष सतनाम सिंह चीमा ने कहा कि मिल चलाने के लिए यूनियन सरकार से मिल में रिसीवर बैठाकर किसानों का बकाया भुगतान करने, मिल को नियमित रुप से चलाने की मांग कर रही है। हिंद मजदूर सभा के प्रांतीय अध्यक्ष वेदप्रकाश विद्यार्थी ने मिल प्रबंधकों से मिल को बंद करने का नोटिस वापस लेने की मांग की अन्यथा जबरदस्त आंदोलन चलाने की धमकी दी। विद्यार्थी ने कहा मिल के पास गन्ने की कमी नहीं है। आगामी सीजन के लिए गन्ना क्षेत्रफल 7605 हेक्टेअर रहा। मिल बंद होने की दशा में सैकड़ों श्रमिक व कर्मचारी परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।

मालिकों की मंशा मिल चलाने की कतई नहीं है। उनकी प्राथमिकता पहले किसानों के बकाया भुगतान करने की है। मिल चलाने के लिए फौरी तौर पर 15 करोड़ रुपये की जरूरत केवल मिल की मरम्मत के लिए पडे़गी, जबकि पिछले सीजन में मिल को 18 करोड़ का घाटा हुआ है।
- राजीव अग्रवाल, प्रधान प्रबंधक, काशीपुर शुगर मिल

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