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माफियाओं ने काट डाले सीमावर्ती जंगल

Udham singh nagar Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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खटीमा। लगता है जंगलात को अपने जंगलों को बचाने की कोई फिक्र नहीं है। तभी तो एक-एक कर उसके जंगलों पर कब्जे होते जा रहे हैं। बात चाहे तराई-भाबर के जंगलों की हो या पहाड़ के जंगलों की, सभी जगहों पर सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि विभाग के हाथों से खिसक चुकी है। अब खटीमा मेें नेपाल यूपी की सीमा पर वन भूमि की जमीन पर खड़े पेड़ों को काटकर भूमाफियाओं ने या तो खेती कर ली है या फिर इस जमीन को बेच दिया है। यही नहीं कई जगहों छालें निकालकर पेड़ों को सुखाया जा रहा है ताकि बाद में इन पेड़ों को काटकर इस जमीन पर भी कब्जा किया जा सके। वन विभाग की इस जमीन पर अब सिर्फ खूंट ही खूंट दिखाई दे रहे हैं।
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सुंदर नगर के पिलर संख्या-17 को जाने वाला मार्ग कभी घने जंगल से घिरा था। सुबह-शाम तो दूर दिन में भी यहां से गुजरना जान-जोखिम में डालने के समान था, लेकिन अब यहां भूमाफियाओं ने जंगल को काटकर वन भूमि की इस जमीन पर या तो खेती कर ली है या फिर इसे बेच डाला है। इस मार्ग पर एसएसबी की दो चौकियों के जवान गश्त पर रहते हैं। बावजूद इसके भूमाफियाओं के हौसले बुलंद हैं।

शनिवार को उप प्रभागीय वनाधिकारी राजेश श्रीवास्तव ने अपनी टीम के साथ मेलाघाट, वनमहोलिया, सुंदर नगर से लगे क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने पाया कि सीमांत क्षेत्र के जंगल काटकर अथवा पेड़ सुखाकर बड़े पैमाने पर जंगल साफ किए जा रहे हैं। एसडीओ फॉरेस्ट ने इसकी रोकथाम के लिए अपने अधीनस्थों को आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि इसके तहत अतिक्रमण को चिन्हित कर नोमैंस लैंड एवं यूपी सीमा के अलावा शेष वन भूमि के अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने एवं खाली भूखंड में शीत एवं ग्रीष्म कालीन प्लांटेशन की योजना बनाई है।
श्रीवास्तव ने वन विश्राम गृह में कहा कि नोमेंस लैंड से तीस मीटर की दूरी एवं सर्वे उपरांत यूपी की सीमा के अवशेष भाग में विभाग प्लांटेशन करेगा। जंगल का सफाया करने वाले भूमाफियाओं को चिन्हित कर उनके विरुद्ध न्यायालय में वाद दायर करेगा। वन विभाग किसी भी स्थिति में जंगल की भूमि को अतिक्रमणकारियों के चंगुल में नहीं रहने देगा। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल सीमा पर जंगल काटकर खेती करने एवं जंगलात की भूमि बेचने का मामला दोनों देशों की कई बार हुई बैठक में जोर-शोर से उठा, लेकिन कोई सकारात्मक हल नहीं निकल सका।

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