खटारा बसें, गड्ढे, गंदगी के ढेर यह है रोडवेज वर्कशाप

Udham singh nagar Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। उत्तराखंड परिवहन निगम के डिपो और वर्कशापों का हाल खस्ताहाल है। बसें खटारा हो चुकी हैं उपकरणों की भी कमी है। हालात यह है कि वर्कशाप में जहां कर्मचारियों की कमी तो है ही वहीं गंदगी से कर्मचारियों को भी गंभीर बीमारियों का खतरा बना हुआ है। वर्कशाप में जगह-जगह बने गड्ढे, छत से टपकता पानी पर विभाग को कोई चिंता नहीं।
सिडकुल बनने के बाद रुद्रपुर परिवहन निगम ने डिपो का विस्तार किया और बसों की संख्या बढ़ा दी। डिपो के पास करीब 55 बसों का बेड़ा है। निगम ने यात्रियों की सहूलियत के लिए बसें तो बढ़ा दी, लेकिन उनकी मरम्मत के लिए बनाई कार्यशाला की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके चलते आज रुद्रपुर डिपो की कार्यशाला खस्ताहाल है। कार्यशाला में जाने के लिए बसों को बड़े-बड़े गड्ढों में हिचकोले खाते हुए जाना पड़ता है। बारिश में अगर इन गड्ढाें में पानी भर जाए तो वाहनों का वहां से निकलना मुश्किल हो जाता है। अगर बात करें कार्यशाला की तो उसकी दीवार कभी भी ढह कर गिर सकती है। दीवारों में पेड़ उग आए हैं। छतों से बरसात में पानी टपकता है। जगह-जगह गंदगी का अंबार लगा है। मजबूरन कर्मचारियों को गंदगी में ही बसों की मरम्मत करनी पड़ती है। यहीं नहीं फोरमैन कार्यालय का भी बुरा हाल है। यहां सीलन से अभिलेखाें का खराब होने का भी खतरा बना हुआ है। कार्यशाला का टायर कक्ष का हाल भी पंचर टायर की तरह है। कंप्रेसर खुले में रखा है। बसों के टायर में हवा की मात्रा बताने वाला मीटर खराब पड़ा है, बावजूद इसके परिवहन निगम इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

कीचड़ और गंदगी से बीमारी का डर
काशीपुर। यहां रोडवेज की वर्कशाप की स्थिति तो बड़ी दयनीय है। वर्कशाप परिसर में फर्श नहीं होने पर कीचड़ का अंबार लगा हुआ है। जगह-जगह पानी भरा होने एवं कचड़े का अंबार लगने से वर्कशाप के कर्मचारियों को संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। बसों में टायर नहीं होने से पांच बसें कई दिनों से खड़ी हुई है, जिस वर्कशाप में कर्मचारी काम कर हैं उस बिल्डिंग की हालत जर्जर होने से इसके कभी भी गिरने का डर कर्मचारियों को बना रहता है। वर्कशाप में डीजल तो भरा जाता है, लेकिन मशीनें टूटी-फूटी स्थिति में है। कर्मचारियों के लिए बनाए गए शौचालय के पास बड़ी-बड़ी झाड़ियां होने से कर्मचारी शौचालय जाने में कतराते हैं।

रखरखाव करने वाले तकनीकी कर्मियों का टोटा
रुद्रपुर। भले ही परिवहन निगम बसों की खरीद में आगे हो, लेकिन रखरखाव करने वाले कर्मचारियों की भर्ती करने के मामले में पीछे है। रुद्रपुर डिपो के कार्यशाला में करीब 60 प्रतिशत पद रिक्त है। जुगाड़ एवं आउटसोर्स के जरिए ही बसों की मरम्मत की जा रही है। नियमानुसार कार्यशाला में 80 कर्मचारी होने चाहिए, इसके विपरीत कार्यशाला में केवल 28 कर्मचारी ही हैं। ऐसे में बसों की कितनी गंभीरता से मेंटीनेंस एवं मरम्मत होती है, सहज अंदाज लगाया जा सकता है।

32 साल से नहीं हुई रंगाई -पुताई
काशीपुर। रोडवेज के सहायक मैकेनिक एवं रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के क्षेत्रीय मंत्री मोहम्मद यामीन ने बताया वर्कशाप लगभग 1980 में बना था। 32 साल से अब तक वर्कशाप के भवनों की मरम्मत तो दूर रंगाई-पुताई तक नहीं हुई है। बरसात के समय टिन शेड से पानी गिरने से कर्मचारियों को भीगते हुए काम करना पड़ता है। वर्कशाप में 20 प्रतिशत मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित है। बसों के पार्ट्स नहीं मिलने से जुगाड़ कर वाहनों को ठीक किया जा रहा है।

अक्षम बस चालक कर रहे चौकीदारी
काशीपुर। रोडवेज की वर्कशाप एवं बसों की सुरक्षा अक्षम बस चालकों के हवाले है। रोडवेज में चार चौकीदार के पद स्वीकृत है, लेकिन वर्तमान में एक ही चौकीदार रोडवेज के पास मौजूद है। हालांकि, तीन और व्यक्ति चौकीदारी काम करते हैं, लेकिन यह वह तीन व्यक्ति हैं जो बस चलाने के दौरान दुर्घटनाओं में बुरी तरह से घायल हो गए थे। रोडवेज ने इन बस चालकों को अक्षम होने पर वर्कशाप की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी।

ये बसें खड़ी हैं बिना टायर और स्पेयर्स पार्ट के
बस संख्या कौन से रूट की
- 6681 एवं 6679 काशीपुर से हरिद्वार
- 6676 एवं 6595 काशीपुर से टनकपुर
- 2132 काशीपुर से रुद्रपुर

वर्कशाप में इन सामानों की है भारी कमी
- बस धोने के लिए डक।
- नई बस लीलैंड के टूल बॉक्स एवं स्पेयर्स पार्ट।
- मोबिल एवं गेयर आयल।
- टायर, टायर रबर एवं ट्यूब।


वर्कशाप में यह पद चल रहे हैं रिक्त
वेल्डर, जूनियर फोरमैन, मैकेनिक इंचार्ज, फीटर, चौकीदार, भंडार कक्ष बाबू, अपोस्टर, पेंटर

डिपो के उच्चीकरण के लिए पीपीपी मोड पर दिया गया है, इसका प्रस्ताव भी पास हो गया है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। डिपो के कार्यशाला में तकनीकी कर्मियों की भर्ती की मांग उत्तराखंड परिवहन निगम मुख्यालय भेजा गया है। निगम के पास टायरों की कमी नहीं है। टायर उपलब्ध हैं कई बार रोडवेज के अधिकारियों से कहा जा चुका है, लेकिन रोडवेज के अधिकारी ही देरी कर रहे है।
-मुकुल पंत, आरएम नैनीताल

गंदगी होने से कर्मचारी को मलेरिया, हैजा जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। वहीं रोडवेज वर्कशाप में काम करते समय वाहनों के अत्यधिक धुएं से कर्मचारी को सांस के रोग हो सकते हैं।
-डा. केके शर्मा, प्रभारी अधीक्षक

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