तेंदुआ का शिकार बना संजीव!

Udham singh nagar Updated Sun, 12 Aug 2012 12:00 PM IST
हल्द्वानी/काशीपुर। जंगल में 11 वर्षीय बालक संजीव को मारने वाला वन्यजीव तेंदुआ हो सकता है। वनाधिकारियों ने घटना स्थल का मुआयना किया है, जिसमें तेंदुआ के पग मार्क मिलने का दावा किया गया है। दूसरी तरफ घटना में बाघिन के हिंसक होने की चर्चा है, जिसके चार शावक जून माह में मारे गये थे। बहरहाल, तय हुआ है कि सेना और वन विभाग के हथियारबंद कर्मी क्षेत्र में गश्त करेंगे।
संजीव के शिकार के बाद वन महकमे में खलबली मची हुई है। वन्यजीव के आदमखोर होने के बाद से वन महकमे की नींद टूटी। अधिकारियों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया है। तराई पश्चिम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी निशांत वर्मा ने बताया कि जहां पर घटना हुई है, उसके पास में तेंदुआ के पग मार्क मिले हैं, जिससे घटना में तेंदुआ के शामिल होने की आशंका ज्यादा है। जहां पर हादसा हुआ है, वहां पर बाघिन के कोई चिन्ह नहीं मिले हैं। फिलहाल जांच की जा रही है। सेना के अधिकारियों से वार्ता हुई है, इसके बाद संयुक्त गश्त करने का फैसला हुआ है। इलाके में कैमरा ट्रैप लगाया गया है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं परमजीत सिंह कहते हैं कि शावकों के जलने की घटना करीब ढाई महीने पुरानी है, इतने समय बाद बाघिन के हिंसक होने की आशंका कम है, फिर भी सभी बिंदुओं पर जांच करने का निर्देश डीएफओ को दिया गया है। सुरक्षात्मक प्रबंध करने को भी कहा गया है। वहीं, इलाके में बाघिन के हिंसक होने की चर्चा है। लोगों के अनुसार कुछ समय पहले बाघिन ने एक मोटर साइकिल सवार पर भी हमला किया था।

संजीव का हुआ पोस्टमार्टम
काशीपुर। 10 अगस्त को गौशाला में जंगली जानवर द्वारा मारा गया बालक संजीव का पोस्टमार्टम हो गया है। रिपोर्ट में मृतक के मुंह तथा सिर के पिछला भाग नोचा हुआ था। चेहरे और सिर पर समानांतर गहरे घाव पाए गए हैं, जो तेज नाखूनों के प्रतीत हो रहे हैं। सिर का भाग भी खुला हुआ है। मृतक के पीठ तथा दोनों हाथों पर भी गहरे घाव थे। लगता है कि जब वन्यजीव ने हमला किया होगा तब बालक ने मुंह बचाने के लिए दोनों हाथों से मुंह ढक लिया होगा, जिससे हाथ पर भी नाखून के निशान थे।

सेना के अधिकारियों की एक नहीं सुनी
काशीपुर। सैन्य क्षेत्र हेमपुर डिपो से लगे जंगल में एक साथ चार शावकों की मौत के बाद भी वन विभाग नहीं चेता। सूत्र बताते हैं कि हेमपुर डिपो के कार्बेट पार्क से सटे होने के कारण डिपो के अधीन जंगलों में जंगली जानवरों का खासा मूवमेंट रहता है। पहले भी जब सैन्य अधिकारियों को जंगल में बाघ के मूवमेंट की जानकारी हुई तो उन्होंने जान-माल की सुरक्षा की दृष्टि से वन अधिकारियों को ट्रेप कैमरे लगाने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने आबादी के पास किसी भी जंगली जानवर के मंडराने पर ट्रंकुलाइजर गन मुहैया कराने को तमाम बार पत्र लिखा। एक सैन्य अधिकारी ने बताया इसका मकसद जानवर को बेहोश कर किसी सुरक्षित ठिकाने में पहुंचाने का था, लेकिन वन विभाग ने कार्रवाई तो दूर पत्र का जवाब तक नहीं दिया।

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