सिडकुल में प्रतिदिन 10 से 12 घंटे की अघोषित कटौती

Udham singh nagar Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
सितारगंज। ऊर्जा प्रदेश में भी बिजली के लाले पड़ रहे हैं। सिडकुल क्षेत्र में प्रतिदिन 10 से 12 घंटे की अघोषित बिजली कटौती हो रही है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ गई है और उद्योगों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। सात उद्योग ऐसे हैं, जिन्हें 24 घंटे बिजली मिलती है। इसके लिए इन उद्योगों को 15 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज देना पड़ता है।
वर्ष 2005 में तत्कालीन एनडी सरकार द्वारा सितारगंज में संपूर्णानंद शिविर (खुली जेल) की 1093 एकड़ भूमि पर सिडकुल की स्थापना की गई थी। ऊर्जा प्रदेश में भरपूर बिजली मिलने के नारे पर उद्योगपतियों ने यहां 340 उद्योग स्थापित किए। इनमें से 110 उद्योगों में उत्पादन हो रहा है। पिछले चार माह से इन उद्योगों में 6 से 22 घंटे तक घोषित-अघोषित रूप से बिजली कटौती हो रही है। वर्तमान में प्रतिदिन 8 से 10 घंटे की अघोषित बिजली कटौती से उद्योगों का उत्पादन ठप हो गया है। बिजली की कमी के कारण उत्पादन की लागत में बढ़ोतरी हो गई है। इससे उद्योगपतियों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
सिडकुल के सात उद्योग 24 घंटे बिजली लेने के लिए महंगी दरों पर इसे खरीद रहे हैं। प्रति यूनिट का उन्हें 15 प्रतिशत अधिक चार्ज देना पड़ रहा है। ऐसे में उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। सिडकुल के उद्योगपतियों ने बताया कि ऊर्जा प्रदेश में भरपूर बिजली मिलने के नारे पर यहां उद्योगों की स्थापना की और उद्योग स्थापित करने के बाद अब बिजली का संकट बना हुआ है। विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता शैलेंद्र सिंह ने बताया कि विद्युत उत्पादन कम होने की वजह से बिजली का संकट है। इस कारण सिडकुल क्षेत्र में शाम 6 से रात 12 बजे तक ऋषिकेश कंट्रोल रूम के आदेश पर कटौती की जा रही है।

उद्योगों में एक तो लो-वोल्टेज की समस्या है। ऊपर से घोषित-अघोषित बिजली कटौती। ऐसे में उद्योगों का बुरा हाल है। सिडकुल में बने 132 केवीए का विद्युत उपसंस्थान केंद्र चालू कराने की मांग के बावजूद अब तक सुचारु नहीं किया गया। बीके अग्रवाल, वरिष्ठ महाप्रबंधक, बालाजी एक्शन लिमिटेड ।

सिडकुल में 8 से 10 घंटे की बिजली कटौती से उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। बिजली के शटडाउन के बाद उत्पादन ठप हो जाता है। सिडकुल का 132 केवीए का उपसंस्थान केंद्र चालू न होने से कई उद्योगों का नए प्लांट लगाने का कार्य पड़ा है। सिडकुल के एमडी से लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी तक से उद्योगपति केंद्र को चालू कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। सुरेंद्र मल्लिक, यूनिट हेड, पारले बिस्किट प्राइवेट लिमिटेड।

उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश माना जाता है। बावजूद इसके उद्योगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। भरपूर बिजली मिलने के आश्वासन पर ही यहां उद्योग लगाए गए, लेकिन उद्योग स्थापित होने के बाद से ही बिजली की समस्या से निजात नहीं मिली। यही कारण है, कई उद्योग अभी उत्पादन शुरू नहीं कर सके हैं। सुरेश कुमार, वाइस प्रेजीडेंट, लाओपाला प्राइवेट लिमिटेड।

उद्योगों में रोजाना हो रही कटौती से 30 से 35 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित हो रहा है। अधिकांश कटौती सायं 5 बजे से रात 12 बजे तक रहती है। इसके अलावा लोकल फॉल्ट के चलते भी रोजाना एक से डेढ़ घंटे तक कटौती रहती है। बताया कि बिजली कटौती के समय माल उत्पादन को जेनरेटर चलाने पर 12 से 14 रुपया यूनिट खर्चा आता है, जो बहुत अधिक है। अजय तिवारी, उपाध्यक्ष सिडकुल इंटरप्रिन्योर वेलफेयर सोसायटी।

घंटों कटौती से कई फक्ट्रियों के प्रबंधकों को अपनी एक-एक शिफ्ट बंद करने को मजबूर होना पड़ रहा है। विकास जिंदल, केजीसीसीआई के अध्यक्ष।

बिजली उत्पादन में कमी आने से बिजली की कटौती की जा रही है। यह कटौती ऋषिकेश कंट्रोल रूम के आदेश पर की जा रही है। नीरज कुमार, डीजीएम बिजली विभाग।

अगस्त प्रथम सप्ताह में सिडकुल क्षेत्र में प्रतिदिन हुई कटौती
1 अगस्त को 6 घंटे
2 अगस्त को 9.30 घंटे
3 अगस्त को 10 घंटे
4 अगस्त को 22 घंटे
5 अगस्त को 17 घंटे
6 अगस्त को 6.30 घंटे
7 अगस्त को 6.30 घंटे
8 अगस्त को 8.30 घंटे

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