कच्चे निर्माण तक सीमित मनरेगा

Udham singh nagar Updated Tue, 17 Jul 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। मनरेगा ग्रामीणों की जरूरत पर खरी नहीं उतर रही है। इससे केवल कच्चे निर्माण ही कराए जा रहे हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के और टिकाऊ निर्माण कार्यों की अधिक दरकार होती है।
मनरेगा के तहत कच्चे निर्माण की वजह 60:40 अनुपात में मिलने वाला बजट बताया जाता है। मतलब विभाग को अवमुक्त कुल बजट का 60 प्रतिशत अकुशल मजदूरों पर और 40 प्रतिशत में से निर्माण सामग्री और कुशल मजदूरों पर खर्च किया जाना है। भले ही अकुशल मजदूरों पर 80 फीसदी तक खर्च किया जा सकता है। लेकिन निर्माण सामग्री और कुशल मजदूरों पर चालीस प्रतिशत से ज्यादा खर्च नहीं किया जा सकता है। इससे चलते विभागीय अधिकारी भी अकुशल मजदूरों के सहारे निर्माण कार्य को प्राथमिकता देते हैं। दरअसल भारत सरकार रोजगार सृजन और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्य के लिए मनरेगा का संचालन कर रही है। रोजगार की दिशा में तो एक हद तक यह योजना सफल रही है। लेकिन इसके तहत केवल कच्चे निर्माण कार्य ही कराए जा रहे हैं। वर्तमान में पिचिंग, तारजाल, बोल्डर पिचिंग, गूलों का निर्माण, कच्ची सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। जबकि ग्रामीणों की जरूरत पक्की सड़कें, विद्यालय भवनों का निर्माण, पेयजल योजना सहित अन्य पक्के और टिकाऊ कार्याें के निर्माण की है।

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