बैगुल नदी बन रही बच्चों की मौत का सबब

Udham singh nagar Updated Mon, 16 Jul 2012 12:00 PM IST
सितारगंज। शक्तिफार्म क्षेत्र में बैगुल नदी मासूमों की मौत का सबब बनती जा रही है। ये नदी डेढ़ वर्ष के भीतर 8 बच्चों को लील चुकी है। अब इस नदी को खूनी नदी के नाम से भी पुकारा जाने लगा है। अधिकांश मौतें नदी में नहाने या फिर मत्स्य आखेट के कारण हुई हैं। फिलहाल जो भी हो, नदी किनारे बसी आबादी के बचाव के लिए प्रशासन द्वारा कोई तारबाड़ नहीं किए गए हैं। वहीं अभिभावक भी अपने मासूमों को खून की प्यासी नदी से बचाने को लेकर गंभीर नहीं दिखते।
बीती 27 दिसंबर 2010 को गोविंदनगर निवासी नौ वर्षीय राजू की नदी में नहाते समय डूबने से मौत हो गई थी। 23 मार्च को मूर्ति विसर्जन के लिए गए अरविंदनगर निवासी चौदह वर्षीय आकाश सरकार को बैगुल नदी ने लील लिया था और 11 जून 2011 को दो परिवारों के चार बच्चों की जान गई थी। झाड़ी नंबर नौ गांव निवासी करन विश्वास (8), पाची विश्वास (11), पूर्णिमा गाईन (11) समरेश गाईन (8) बैगुल नदी में नहाते समय डूबकर काल का ग्रास बन गए थे। मृतकों में करन-पाची एवं पूर्णिमा-समरेश आपस में भाई-बहन थे। इसके अलावा 6 जुलाई 2011 को राजनगर गांव निवासी तुषार मंडल का आठ वर्षीय पुत्र तापस मंडल मछली पकड़ने गया था, जिसकी डूबने से मौत हो गई थी। रविवार को नदी ने शौच को गए राजनगर निवासी नकुल मंडल (14) पुत्र नरेंद्र मंडल को अपनी आगोश में ले लिया।

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