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माओवाद में फंसे आठ आरोपी बरी

Udham singh nagar Updated Fri, 15 Jun 2012 12:00 PM IST
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रुद्रपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शमशेर अली ने आठ तथाकथित माओवादियों को बरी कर दिया है। कोर्ट का मानना है कि पुलिस द्वारा अभियुक्तों से बरामद दिखाई गई सामग्री केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा प्रतिबंधित नहीं है और जिन दो अखबारों में सामग्री को सील किया गया था वे दोनों ही घटना के करीब ढाई माह बाद के थे। इसके अलावा, सीआरपीसी की धारा 196 के तहत शासन से बहुत बाद में अनुमति ली गई थी। इतना ही नहीं, अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए पुलिस गवाहों के बयानों में काफी विरोधाभास था। न्यायालय ने सभी आरोपियों उनको बरी कर दिया।
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तत्कालीन नानकमत्ता के थानाध्यक्ष बीएस रावत ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा था कि उन्होंने पुलिस के साथ 29/30 अगस्त 2004 की सुबह करीब 6.30 बजे ग्राम रन्साली विचवाभूड़ विचई व हसपुर खत्ता सौ फिटिया जंगल क्षेत्र में पकड़े गए तथाकथित माओवादियों को षड्यंत्र रचने, राष्ट्र विरोधी सामग्री अपने कब्जे में रखकर आपराधिक षड्यंत्र करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने माओवाद के पर्चे बांटकर देश की एकता को खंडित करने का प्रयास किया। उनसे राष्ट्र विरोधी सामग्री भी बरामद की गई। इस मामले में आमखरक जिला चंपावत निवासी अनिल चौड़ाकोटी उर्फ हेम पुत्र नारायणदत्त, हंसपुर खत्ता थाना चोरगलिया जिला नैनीताल निवासी हयातराम पुत्र जसराम, रामलाल उर्फ रमेशलाल पुत्र टीकाराम व प्रकाश राम पुत्र हयातराम मूल निवासी छतगल्ला थाना द्वाराहाट जिला अल्मोड़ा, हाल निवासी खत्ता बंगर थाना हल्द्वानी निवासी ईश्वर चंद जूनियर पुत्र स्व. घनानंद फुलारा, कुकना पट्टी मल्ली थाना मुक्तेश्वर जिला नैनीताल निवासी हरीश राम उर्फ मनोज उर्फ विपिन पुत्र जयराम व संतोष राम उर्फ कमलेश उर्फ पुष्कर पुत्र मोतीराम, ग्राम दुम्का बंगल हल्दुचौड़ थाना लालकुंआ जिला नैनीताल निवासी गोपाल भट्ट उर्फ विवेक पुत्र लक्ष्मीदत्त भट्ट, औडाया पट्टी शहर फाटक जिला अल्मोड़ा निवासी ललित मोहन उर्फ सूरज पुत्र शिवराम, ग्राम सैनी थाना सितारगंज जिला ऊधमसिंह नगर निवासी कैलाश पुत्र राधेश्याम एंव ग्राम कल्याणपुर थाना सितारगंज जिला ऊधमसिंह नगर निवासी कल्याण सिंह पुत्र जीवन सिंह कार्की के विरुद्ध अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शमशेर अली की अदालत में धारा 120 बी/121/121ए/124ए भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा चला। इस दौरान कैलाश व कल्याण सिंह की मौत हो गयी और ललित मोहन को नाबालिग होने के कारण उसका केस अन्य कोर्ट में भेज दिया। इस मुकदमे में सरकारी वकील लक्ष्मीनारायण पटवा ने 14 गवाह पेश किए। मगर अपराध सिद्ध नहीं कर पाए। बृहस्पतिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शमशेर अली ने आठ अभियुक्तों को आरोप सिद्ध न होने पर बाइज्जत बरी कर दिया।
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