जंगल की आग की भेंट चढ़े बाघ के चार शावक

Udham singh nagar Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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काशीपुर। रिमाउंड ट्रेनिंग स्टेशन एंड डिपो (आरटीएस एंड डिपो) के करीब गौशाला से सटे जंगल में लगी आग से बाघ के तीन शावकों की झुलस कर मौत हो गई, जबकि बुरी तरह झुलसे एक शावक ने डिपो की डिस्पेंसरी में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। फायरब्रिगेड और आर्मी के जवानों ने घंटों मशक्कत कर आग पर काबू पाया। आग की चपेट में आने से पहले एक हाथी, हिरन एवं मोर को भगाकर उनकी जान बचाई गई। वन विभाग के अधिकारियों ने शावकों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम किया। अलबत्ता वन विभाग के डीएफओ बाघ के इकलौते शावक के झुलस कर मरने की पुष्टि कर रहे हैं।
बीते दिन मंगलवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे डिपो परिसर से सटे जंगल में अज्ञात कारणों के चलते आग लग गई। तेज हवा के कारण आग ने डिपो के जंगल को भी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। कैंट एरिया में आग लगी देख आर्मी अफसरों ने फायरब्रिगेड को सूचित किया। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों एवं आर्मी के जवानों ने आग बुझाने का काम शुरू किया। इस दौरान कर्मचारियों को आग से झुलसकर मरे बाघ के तीन शावक मिले, जबकि झुलसे हुए चौथे शावक को आर्मी के जवानों ने पानी डालकर राहत देने की कोशिश की, फिर उसे डिपो के पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया, लेकिन उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
वहीं आग के दौरान बाघिन कहीं नजर नहीं आई। अंदाजा है कि आग लगने के बाद बाघिन शावकों को छोड़कर भाग गई होगी। इधर, बुधवार को सूचना मिलने पर डीएफओ निशांत वर्मा दल बल के साथ मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने इलाज के दौरान मरे शावक के शव को कब्जे में लेकर डिपो की डिस्पेंसरी में ही पोस्टमार्टम कराया। डीएफओ ने बताया मृत शावक करीब 10-15 दिन की मादा है। इस दौरान डिपो के कमांडेंट कर्नल राजन थापर आदि भी मौजूद थे।

डिपो के 1500 हेक्टेयर में फैले जंगल में आग के कारणों की जांच की जा रही है। आग की घटना में झुलस कर बाघ के एक शावक की मौत हुई है, जबकि तीन अन्य शावकों की खोज के लिए सर्च आपरेशन चलाया जा रहा है। जांच पूरी होने पर यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-निशांत वर्मा, डीएफओ

जंगल में आग लगने से बाघ के चार शावकों के मरने की घटना बेहद गंभीर है। वन विभाग के अधिकारी हर बार की तरह इस बार भी एक शावक के मरने की पुष्टि कर मामले को दबा रहे हैं, जिस जंगल में आग लगी उस क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए, यदि इसी तरह जंगलों में बाघों का अवैध शिकार एवं आग लगती रही तो एक दिन रामनगर कार्बेट पार्क से बाघ विलुप्त हो जाएंगे।
-मदन जोशी, अध्यक्ष बाघ बचाओ समिति, रामनगर

आग करीब 200 से 300 एकड़ के जंगल में लगी थी। आर्मी के डेढ़ सौ जवानों ने अधिकारियों के साथ आग बुझाने का काम किया। झुलसे हुए शावक को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन उसने दम तोड़ दिया। अंदेशा है कि धुआं फेफड़ों और हृदय में पहुंचने से दम घुट गया हो। उसे बर्न थेरिपी के अलावा ड्रिप भी लगाई गई थी। इसके बाद आग की दूसरी घटना ढेला नदी से सटे जंगल में लगी थी, जिसे आर्मी के जवानों ने बुझा दिया था।
-कर्नल राजन थापर, कमांडेंट आरटीएस एंड डी

...तो किसी की लापरवाही से लगी आग
काशीपुर। जंगल क्षेत्र से किसी भी प्रकार की विद्युत लाइन के नहीं गुजरने से संदेह है कि किसी की लापरवाही से जंगल में आग लगी है। फायरब्रिगेड कर्मचारियों ने बताया उनके पहुंचने से पहले ही आर्मी के जवानों ने एक हाथी, हिरन एवं मोर को आग की जद में आने से पूर्व घने जंगलों में खदेड़ दिया था। उन्होंने बताया रात 8.50 बजे भी जंगल में आग लगी, जिसे देर रात साढ़े बारह बजे तक बुझा लिया गया। आग बुझाने में फायर कर्मी खीमानंद, सुनील, नरेंद्र तोमर, विकास रावत, दिनेश सिंह चौहान आदि शामिल थे।

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