बांध की झील में डूबकर दो छात्रों की मौत

Tehri Updated Tue, 06 May 2014 05:30 AM IST
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नई टिहरी। टिहरी बांध की झील में डूबकर दो छात्रों की मौत हो गई है। सोमवार को दोनों छात्रों का शव झील से बरामद कर लिया गया है। छात्रों की मौत की सूचना के बाद केंद्रीय विद्यालय और कान्वेंट स्कूल में शोक की लहर छाई रही।
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बीते रविवार को कोटी स्थित सीआईएसएफ कालोनी निवासी आशुतोष ऊर्फ सोनू (9) पुत्र तेज नारायण यादव और अजय शर्मा (17) पुत्र बोधराज शर्मा अपराह्न एक बजे टिहरी बांध की झील मेें नहाने गए हुए थे। लेकिन परिजनों को उनके झील में नहाने जाने की कोई भनक नहीं लगी। शाम 3.30 बजे तक जब दोनों बच्चे घर नहीं लौटे, तो परिजनों ने ढूंढ खोज की। कोई जानकारी नहीं मिलने पर परिजनों ने उनके दोस्तों को पूछा, तो उन्होंने बताया कि शनिवार को उन्होंने झील में नहाने की बात कही थी। उसके बाद झील किनारे तलाशी लेनी शुरू की गई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची, लेकिन बारिश होने के कारण छात्रों का पता नहीं चल पाया। रविवार सुबह 8.30 बजे दोनों बच्चों के कपडे़ कोटी कालोनी मंदिर के समीप पडे़ मिले। कुछ देर बाद गौताखोरों ने जहां कपडे़ पडे़ थे उससे 15 मीटर आगे झील से दोनों के शव बरामद किए। अजय केंद्रीय विद्यालय में 10वीं और आशुतोष कान्वेंट स्कूल में 5वीं का छात्र था। अजय के दो छोटे भाई हैं और आशुतोष का एक छोटा भाई और एक बहन है। दोनों के पिता कोटीकालोनी में सीआईएसएफ में तैनात हैं।
मौत की कब्रगाह बन रही बांध की झील
नई टिहरी। टिहरी बांध की झील मौत की कब्रगाह बनती जा रही है। पिछले एक साल में झील से डूबकर आठ लोगाें की मौत हो चुकी है। झील क्षेत्र में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होेने के कारण इस तरह के हादसाें में इजाफा होता जा रहा है।
वर्ष 2005 में जब से झील ने 42 वर्ग मीटर का आकार लिया, तब से झील में डूबने वालों की संख्या 50 से अधिक पहुुंच गई है। लेकिन सटीक आंकडे़ किसी के पास उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2013 में कोटी कालोनी से तिवाड़ गांव के बीच आठ लोग अलग-अलग स्थानों पर झील में डूब चुके हैं। इसका एक प्रमुख कारण झील क्षेत्र में सुरक्षा के इंतजाम नहीं होने तथा आसपास लोगों को सतर्क करने के लिए कोई साइन बोर्ड नहीं लगा होना है। झील से लोगों को आरपार कराने वाली नाव के लिए भी कोई प्लेट फार्म नहीं है।
कोटीकालोनी व्यापार मंडल के अध्यक्ष कुलदीप पंवार का कहना है कि झील के दोनों तरफ सुरक्षा की दृष्टि से तारबाड़ होना चाहिए। जिन स्थानों से बोट चलती है सिर्फ उसी रास्ते को खुला रखना चाहिए। कहने को तो कोटी कालोनी में जल पुलिस रहती है, लेकिन जरूरत के वक्त जल पुलिस नहीं आती है। बीते दिन जब दो छात्र झील में डूब गए थे, तो सर्च अभियान के वक्त सिर्फ जल पुलिस का एक ही कर्मचारी वहां उपलब्ध हो पाया।

कोटी कालोनी में आठ जल पुलिस के जवान तैनात हैं, लेकिन इन दिनाें कुछ लोग चुनाव ड्यूटी और कुछ बदरीनाथ-केदारनाथ गए हुए हैं।
-जन्मेजय खंडूड़ी, पुलिस अधीक्षक टिहरी
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