‘बेटा वंश है तो बेटी अंश है’

Tehri Updated Tue, 21 Jan 2014 05:48 AM IST
चंबा (टिहरी)। अगर बेटा वारिस है तो बेटी पारस है। अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है। बेटा और बेटी में भेदभाव समाप्त होने पर ही बेटियां सुरक्षित बच सकती हैं। संजीवनी पंचकर्म केंद्र की ओर से महिला बाल विकास पर आयोजित गोष्ठी में विशेषज्ञों ने यह बात कही। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि बेटियों को शिक्षा प्रदान करना जरूरी है। केंद्र की संचालिका डा. प्रीति जोशी ने अमर उजाला की मुहिम ‘बेटी ही बचाएगी’ की सराहना करते हुए कहा कि बेटा और बेटी के साथ समान व्यवहार करें। आज बेटियों के सामने घर-परिवार, परिवेश-समाज, रीति-नीतियों तथा परंपराओं के नाम पर जो अनेक समस्याएं हैं, उनका निराकरण अच्छी शिक्षा के धन से संपन्न होकर ही कर सकते हैं। डा. दिनेश जोशी ने कहा कि शिक्षित होकर बेटियां देश की भावी पीढ़ी को योग्य बनाने के लिए उचित मार्ग-दर्शन कर सकती हैं। इस मौके पर जितेंद्र सिंह नेगी, आरके डबराल, राहुल नेगी और आरएस रावत आदि मौजूद थे।

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