खिड़की से झांकते चेहरों पर डर के निशां

Tehri Updated Tue, 29 Jan 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
घनसाली (टिहरी)। नवोदय विद्यालय पौखाल में जहां कल तक पढ़ाई के शब्द गूंजते थे, वहां आज खौफनाक सन्नाटा है। छात्रावास की खिड़कियों से झांकते बच्चे जैसे स्वयं को किसी कैदखाने में महसूस कर रहे हैं। हर आंख मुख्यद्वार की ओर अपने परिजनों के आने का इंतजार कर रही हैं। बच्चों के स्याह चेहरे विद्यालय में अपनी घुटन को व्यक्त करना चाहते दिखते हैं। लेकिन विद्यालय प्रशासन ने केवल इतनी ही ढील दी है कि कोई अभिभावक अगर मिलना चाहे तो वह अपने पाल्य से ही मिल सकता है। खिड़कियों से झांकते बच्चे इतनी खामोशी ओढ़े हैं कि वह आपस में भी नहीं बतिया रहे हैं। छात्रावास में सुरक्षा इंतजाम न होने से भी अब कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
विज्ञापन

प्रतापनगर से 1996 में जवाहर नवोदय विद्यालय इसलिए पौखाल अंतरित किया गया था कि वहां छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं हासिल हो सकेंगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। स्थिति यह है कि 335 छात्र-छात्राओं वाले छात्रावासों में एक सुरक्षा कर्मी तक तैनात नहीं है। छात्रावास से बच्चे बाहर न जाएं, इसके लिए वहां सुरक्षा दीवार तक नहीं बनाई गई। जबकि छात्रावास जंगल से सटा है। पहाड़ में वन्य जीवों के लगातार हमलों के बावजूद विद्यालय प्रशासन ने कभी इस दिशा में नहीं सोचा। बच्चों की सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलने के लिए पौखाल के शिवलाल, सोबन सिंह, गीता देवी, विमला देवी का यह बयान ही काफी है, जिसमें वह कहते हैं कि गांव में शादी होने पर स्कूल के कई बच्चे रात को गांव में पहुंच जाते हैं। इससे अलग परिजनों को नियमों-कानूनों के जाल में ऐसे फंसाया जाता है कि कभी कोई बच्चे अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाते। 26 जनवरी को छात्रा के आत्महत्या की घटना के बाद बच्चों में खौफ है। परिसर में सन्नाटा पसरा है। बच्चों की आंखों में डर साफ देखा जा सकता है। इस घटना के बावजूद छात्र-छात्राआें को किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। सोमवार को विद्यालय में शैक्षणिक कार्य बंद रहा। सुबह विद्यालय खुलने पर शोक सभा हुई, जिसके बाद छात्र-छात्राएं छात्रावास में अपने-अपने कमरों में चले गए।



कोट-
छात्रावास के चारों और बाउंड्रीवाल के लिए तीन वर्ष पहले निर्माण निगम को ठेका दिया गया है। लेकिन उसका कार्य नहीं हो पा रहा है। दो चौकीदार छात्रावास में हर वक्त तैनात रहते हैं। वैसे तो अभिभावक रविवार को ही अपने पाल्य से मिल सकता है। लेकिन इस घटना के बाद आज कोई भी अभिभावक अपने बच्चे को मिल सकता है। इस पर कोई रोक नहीं है। -रजनीकांत पाठक प्राचार्य जवाहर नवोदय विद्यालय पौखाल

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X