वन अधिकारों को आज भी जारी है संघर्ष

Tehri Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
चंबा (टिहरी)। स्व. प्रताप शिखर की स्मृति में आयोजित पांचवीं व्याख्यान माला के अवसर पर वन अधिकारों और वन पंचायतों पर विचार-विमर्श किया गया। इस मौके पर ब्रिटिश शासन काल और वर्तमान समय के वन अधिकारों पर लोगों ने अपनी बात रखीं।
सोमवार को खाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार ईश्वर जोशी ने कहा कि लोगों ने अपने वन अधिकारों के लिए ब्रिटिश शासन के समय से संघर्ष शुरू किया, जो स्वतंत्रता और उसके बाद तक भी जारी है। लोगों के संघर्षों का ही परिणाम है कि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को वन पंचायतों का गठन करके लोगों के अधिकारों को सुनिश्चित करना पड़ा। स्वतंत्र भारत की सरकारों ने वन कानूनों में फेर बदल करके इसे और अधिक जन विरोधी बनाया है। वन पंचायतों के अस्तित्व को सरकारों ने षड्यंत्र पूर्वक समाप्त करने की लगातार कोशिश की है। इस अवसर पर अरण्य रंजन, वन पंचायत सरपंच मंगला नंद उनियाल, लीलानंद सकलानी, महिला समाख्या की ममता, किरन, राजेश्वरी, शीशपाल भंडारी, पूनम आदि मौजूद थे।

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