नई पटवारी चौकियों पर ताले, लोग परेशान

Tehri Updated Fri, 09 Nov 2012 12:00 PM IST
नई टिहरी। जिले की करीब 35 नवनिर्मित पटवारी चौकियों पर ताले लटके हुए है। फिलहाल ये चौकियां आवारा पशुओं तथा पक्षियों का रैन बसेरा बनी हुई है। पटवारी इतने सुविधा भोगी हो गए कि वे कस्बाई बाजारों की अस्थाई चौकियों से गांवों में बनी नई पटवारी चौकियों में जाने को तैयार नहीं है। लाखों की धनराशि खर्च कर जिन उद्देश्यो को लेकर इन चौकियों का निर्माण किया गया था वह पूरे नहीं हो पा रहे हैं। दूर-दराज के ग्रामीणों को अपने मूल निवास, स्थाई निवास, जाति, आय प्रमाण पत्र बनाने तथा भूमि सबंधी पत्रावलियों की जांच पड़ताल के लिए कस्बाई बाजारों में स्थित पटवारी चौकियों के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले के अलग-अलग राजस्व क्षेत्रों में 176 पटवारी चौकियों का निर्माण होना था। चौकियों के भवन निर्माण के लिए शासन से अलग-अलग समय में 10 करोड़ 53 लाख 94 हजार की धनराशि की स्वीकृति मिली थी, लेकिन अभी तक 122 चौकियों के भवनों का निर्माण पूरा कर राजस्व विभाग को हस्तांतरित की गई है। 20 चौकियां निर्माणाधीन है। 34 चौकियां का निर्माण शुरू हुआ है। चौकियों के निर्माण पर आठ करोड़ 54 लाख 89 हजार खर्च भी हो चुका है, लेकिन हस्तांतरित की गईं 122 चौकियों में से 35 से ज्यादा चौकियों में पटवारियों के न जाने से उनके ताले तक नहीं खुल पाए। स्वीकृति छह कानूनगो चौकी में से नैनबगाव, चमियाला, लंबगांव पर निर्माण शुरू नहीं हो सका।


इन चौकियों में नहीं जाते पटवारी
प्रतापनगर के लंबगांव से सिलवालगांव, पनियाला, छेरपधार, कोटगा, सिलारी, गोदड़ी और पिनालीधार की चौकियां संचालित हो रही है। जबकि इन चौकियों के लिए कई साल पहले भवन बनाए गए हैं। पाख, मैगाधार, पंगरियाणा, गंगी, देवट, गोना, भटगांव, कोटी, सरांसगांव सहित तीन दर्जन ऐसी चौकियां है, जो कागजों में तो चौकी में चल रही है, लेकिन वास्तव में कार्यालय कई अन्य स्थानों पर संचालित हो रहे हैं।

कोट---
कई चौकियों में बिजली, पानी और अन्य समस्याएं होने के कारण वे विधिवत रूप से संचालित नहीं हो रही है। सभी सुविधाएं पूरी कर जल्द से जल्द उन्हें मूल भवनों पर संचालित करने की कार्रवाई सुनिश्िचित की जाएगी। -प्रवेश चंद्र डंडरियाल, अपर जिलाधिकारी टिहरी


इनसेट----

पटवारी सर्किल खाली, कैसे हों काम
कर्णप्रयाग। ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे पटवारियों के आधा दर्जन पद रिक्त होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अपराधिक मामलों के साथ ही प्रमाणपत्रों व भू अभिलेखों से संबंधित कार्यों में भी दिक्कत पेश आ रही है। तहसील के 14 पटवारी क्षेत्रों में केवल आठ की काम कर रहे हैं जबकि नायाब तहसीलदार का पद भी एक साल से रिक्त है। इस पद पर राजस्व निरीक्षक प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जबकि एक पटवारी के पास अन्य सर्किल का चार्ज होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इधर, तहसीलदार चतर सिंह चौहान ने बताया कि रिक्त क्षेत्रों में पटवारियों की नियुक्ति और नायब तहसीलदार की नियुक्ति के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है।

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