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डेढ़ दर्जन सड़कों पर फंसे पेंच

Tehri Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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नई टिहरी। थौलधार प्रखंड की डेढ दर्जन सड़कें लोनिवि और वन विभाग के फेर में फंसी है। जिससे 40 से अधिक गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीण मीलों पैदल चलने को मजबूर हैं। कई बार मांग करने पर भी स्वीकृत सड़कों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो रहा है। साथ ही सात ऐसी सड़कें है, जिनका निर्माण मानक के अनुरूप न होने से आरटीओ ने वाहनों की आवाजाही की अनुमति नहीं दी है।
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थौलधार प्रखंड के मैंडखाल-बंगियाल, मैसारी-थौलधार, मैडखाल-गैर नगूण, घूघती-डूंगा-धमाड़ी, उनियालगांव-नागरजाधार, कांनसी-मनस्यूड, कांडीखाल-बागबाटा, कांडीखाल-सेलूर बाल्काखाल सड़क का निर्माण दो से तीन वर्ष पहले हो चुका है। लेकिन निर्माण मानक के अनुरूप न होने से आरटीओ से इन पर यातायात की अनुमति नहीं मिल पाई। छाम- मैंडखाल, सरोट-चापड़ा, नगुण-भवान, नागराजाधार-जामणी, स्यांसू पुल-रतवाड़ी, रत्नौगाड़-क्यूलागी, जाख-डोबरा मार्ग का डामरीकरण भी लंबे समय से नहीं हो पाया है। लोनिवि इन सड़कों के गड्डे भरने, दीवार लगाने के नाम पर दैवीय आपदा मद से पिछले वर्षों में दो करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। फिर भी सड़कों की स्थिति खस्ताहाल बनीं हैं।


सड़कें बनने पर इन गांव को मिलता लाभ
महेड़, दड़माली, कौडू बड़ा और छोटा, कटखेत, बगून, घियाकोटी, बिंदाल कोटी, घोन, कंस्यूड, झकोगी, रैदोणी, चौगांणी, किलवांणगांव, बरनू, नैर कैंथोगी, कोटी रौल्यूली की, हड़गी, महरगांव, डांग तल्ला, बागी, खाद, गाफर गांव।

वन भूमि के कारण लंबित सड़कें
ज्वारना बंगियाल-10 किमी, ठांगधार-थौलधार 10 किमी, कांदला बैंड़-कटखेत 16 किमी, लालूरी-घोन घियाकोटी 10 किमी, मैंडखाल-खाद साबली 14 किमी, ज्वारना- कंस्यूड 16 किमी, चापड़ा-मोलधार 18 किमी।

इनका कहना है
सड़कों को लेकर लगातार संघर्ष किया जा रहा है। वर्ष 2011 में वन भूमि हस्तांतरण को लेकर मुख्य वन संरक्षक देहरादून के कार्यालय में चार दिन का धरना दिया गया। 18 जुलाई को ब्लाक मुख्यालय कंडीसौड़ में धरना-प्रदर्शन कर उत्तरकाशी-चंबा मार्ग पर जाम लगाया गया था। बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। -जोत सिंह बिष्ट, सदस्य जिला पंचायत थौलधार।

वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। ज्वारना-बंगियाल मार्ग पर पेड़ अधिक आने से दो बार वन मंत्रालय ने निरस्त कर दिया है। डामरीकरण का प्रस्ताव भी सरकार को भेजे गए हैं। -विष्णु कुमार शर्मा, एसई लोनिवि।

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